डॉलर के सामने पस्त हुआ रुपया, ऐतिहासिक गिरावट के साथ रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा!

Business News: भारतीय बाजार में आज रुपये की शुरुआत काफी कमजोर रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे टूटकर 92.35 के स्तर पर खुला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की बढ़ती मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। इस गिरावट ने निवेशकों और आयातकों की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं।

रुपये में गिरावट के मुख्य कारण

विदेशी मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों के संकेत से डॉलर इंडेक्स में तेजी आई है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार पूंजी निकालने के कारण भी रुपये की सेहत बिगड़ रही है। घरेलू बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया अपने शुरुआती कारोबार में ही संभल नहीं सका।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

रुपये के कमजोर होने का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, जिसका भुगतान डॉलर में करना होता है। रुपया गिरने से तेल आयात महंगा हो जाएगा, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। साथ ही, विदेश में पढ़ाई और घूमना भी अब भारतीयों के लिए महंगा साबित होगा।

आरबीआई की दखल पर टिकी नजरें

बाजार के जानकारों का मानना है कि रुपये को और अधिक गिरने से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही हस्तक्षेप कर सकता है। आरबीआई अक्सर विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट को थामने की कोशिश करता है। आने वाले हफ्तों में वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियां और कच्चे तेल की चाल ही रुपये की अगली दिशा तय करेंगी।

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