चंडीगढ़-शिमला फोरलेन पर हो रहे हादसे, अब तक एक ही जगह पर पलट चुके हैं 41 वाहन

सोलन: चंडीगढ़-शिमला फोरलेन निर्माण पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर कई ब्लैक स्पॉट बन गए हैं, जिसके कारण वाहनों की दुर्घटना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सोलन के समीप समलेच के पास पिछले 3 महीनों में करीब 41 वाहन पलट चुके हैं। इन सभी सड़क हादसों में कोई जानी नुक्सान नहीं हुआ है लेकिन वाहन तो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सोमवार रात को इस स्थान पर दो और वाहन पलट गए। वहां पर लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए प्रशासन ने भी इसका कड़ा संज्ञान लिया है। प्रशासन ने इस मामले में फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी के अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। यदि सड़क के निर्माण में इंजीनियरिंग की त्रुटि है तो इसे तुरंत दूर किया जाए।

बताया जा रहा है कि तीखे मोड़ की वजह से चालक तेज रफ्तार से चल रहे वाहन पर नियंत्रण खो रहे हैं और वाहन पलट रहे हैं। एक के बाद एक हो रहे हादसों ने प्रशासन की तो नींद उड़ा दी है लेकिन फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी ने इन दुर्घटनाओं को फिलहाल गंभीरता से नहीं लिया है। यही वजह है कि वहां पर अभी ऐसे कोई भी उपाय नहीं किए गए हैं जिससे इन हादसों को रोका जा सके। ये सभी हादसे समलेच में फोरलेन पर बनी टनल के पास ही हो रहे हैं। सोलन से जब चंडीगढ़ की ओर जाते और समलेच के पास टनल की ओर जाने के लिए जैसे ही पुल को पार करने के बाद थोड़ी सी प्लेन सड़क के बाद एक मोड़ आता है। इस मोड़ को काटते ही गाड़ी अचानक पलट जाती है। हालांकि अधिकांश मामलों में ओवर स्पीड ही दुर्घटना का कारण बताई जा रही है लेकिन वहां पर स्पीड लिमिट के साइन बोर्ड भी नहीं लगे हैं। इसलिए ओवर स्पीड कहना भी उचित नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि वहां पर वन-वे ट्रैफिक है। यदि टू-वे टै्रफिक होता तो यह नुक्सान और भी बड़े हो सकते हैं।

परवाणु से सोलन-चम्बाघाट तक ग्रिल और सोलन के चम्बाघाट से कैथलीघाट तक एरिफ कंपनी द्वारा फोरलेन का निर्माण कार्य किया जा रहा है। परवाणु से चम्बाघाट तक करीब 80 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। चम्बाघाट से परवाणु तक फोरलेन तक कई तीखे मोड़ हैं जबकि उम्मीद की जा रही थी कि फोरलेन निर्माण के चलते इन तीखे मोड़ों को खत्म किया जाएगा जबकि ऐसा नहीं हुआ है। ये सभी मोड़ अब ब्लैक स्पॉट बन गए हैं। मजेदार बात यह है कि इन तीखे मोड़ों को समाप्त करने के लिए साथ काफी खाली जगह भी थी। यदि जरूरी होता तो खाली जगह का अधिग्रहण भी किया जा सकता था ताकि मोड़ को आसान बनाया जा सके। फोरलेन के कारण वाहनों की स्पीड बढ़ गई है और जैसे ही तीखे मोड़ आ रहे हैं तो नियंत्रण खोते ही दुर्घटना हो रही है।

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