सिग्नल ढूंढते पहाड़ियों पर पहुंच रहे लाहौल स्पीति के बच्चे, नही मिल रहा नेटवर्क

जनजातीय क्षेत्र लाहुल-स्पीति की मूरिंग व थिरोट पंचायत के बच्चों को वर्चुअल पढ़ाई के लिए अपने गांव से पांच से 10 किलोमीटर पैदल चल कर आना पड़ता है। कोरोना काल के चलते जहां बड़ी सावधानी की जरूरत है, वहीं पर इन बच्चों को सड़क के किनारे बैठ कर अपनी पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिला लाहुल-स्पीति के उदयपुर उपमंडल के मुरिंग, थिरोट, मडग्रां, सलग्र, तिंदी, मयाड़ वैली के टिंगरेट और चिमरेट में भी सिगनल नहीं आता है।

बच्चों को वर्षा के दौरान अपनी जान को जोखिम में डाल कर सिग्नल की तलाश में भटकना पड़ता है।

वैसे बरसात के चलते जनजातीय क्षेत्र में भू-स्खलन का भय हर पल बना रहता है, जिसके कारण घर में अभिभावकों को पढ़ाई करने की एवज में बच्चों की चिंता रहती है। मूरिंग पंचायत के प्रधान गणेश व उपप्रधान देवीसिंह समिति सदस्य सुमन, पवन, रोशनलाल व अमरसिंह का कहना है कि झोलिंग में जियो कंपनी ने नेटवर्क का सारा कार्य पूरा कर लिया है लेकिन नेटवर्क चालू न होने से लोगों व बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पर रहा है। लोगों का प्रशासन से आग्रह है कि नेटवर्क को स्थापित करने के लिए जहां सारा कार्य पूरा कर लिया है तो कंपनी उसे चालू क्यों नहीं कर रही है। इस क्षेत्र के बच्चे मार्च 2020 से नेटवर्क के न होने से अपनी पढ़ाई के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर नेटवर्क की तलाश में सड़क के किनारे बैठ कर पढ़ाई करने पर मजबूर हो रहें हैं। वहीं, पर उदयपुर उपमंडल क ा अधिकतर क्षेत्र इस समस्या से जुझ रहा है, जहां पर नेटवर्क नहीं हैं। क्षेत्र के लोगों ने आश्चर्य जताया है लाहुल-स्पिति के जिन क्षेत्रों में नेटवर्क नहीं हैं, वह क्षेत्र तकनीकी मंत्री का गृह क्षेत्र है, जहां के बच्चों नेटवर्क की तलाश में सड़कों के किनारे बैठकर पढ़ाई कर रहें हैं।

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