हिमाचल पुलिस का कारनामा; शिमला के समाजसेवी और भीम आर्मी के अध्यक्ष को बिना कसूर थाने बुला कर किया प्रताड़ित

हिमाचल प्रदेश पुलिस आम जनता तो छोड़ो, समाजसेवियों तक को प्रताड़ित करने से नही छोड़ती। बड़े बड़े पदों पर बैठे पुलिस अधिकारी मनमर्जी करने और खास कर अनुसूचित जाति के समाजसेवियों को कैसे प्रताड़ित करती है, इस बात का पता इस बात से चल जाता है कि आज शिमला के प्रसिद्ध समाजसेवी रवि कुमार दलित को बिना कसूर थाने बुलाया गया और थाने में ऑफिस से बाहर बिठा कर प्रताड़ित किया गया।


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जानकारी के मुताबिक आज संजौली पुलिस थाने से दो महिला पुलिस कांस्टेबल संजौली में रवि कुमार दलित को लेने उनकी दुकान पर पहुंची। दोनों महिला कांस्टेबल का कहना था कि आपको एएसआई मैडम ने बुलाया है और आपको अभी के अभी थाने चलना होगा। जब रवि कुमार दलित ने पूछा कि क्या कारण है तो दोनों महिला कांस्टेबल ने बताया कि आपके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है और आपको साथ चलना होगा।

रवि कुमार दलित उसी समय उनके साथ थाने चल दिए। जब वह थाने पहुंचे तो एएसआई के सामने दो लोग बैठे थे। रवि कुमार दलित ने पूछा कि आपने मुझे बुलाया तो एएसआई महिला अधिकारी बिना कोई शिनाख्त या जान पहचान किए उनको थाने में बैठने का हुक्म दे दिया। काफी देर बैठने के बाद जब रवि कुमार दलित ने फिर पूछा कि मुझे क्यों बुलाया है तो एक बार फिर एएसआई ने उनको रुकने को कहा। उस पर रवि कुमार दलित ने बताया कि मैं एक सब्जी विक्रेता हूँ और आजकल 9 से 2 बजे तक ही सब्जी बेचने का समय मिलता है। तब जाकर एएसआई ने उनको बताया कि आपके खिलाफ पुलिस अधीक्षक आफिस से शिकायत आई है। आप किसी चौहान नाम के व्यक्ति से लड़ाई झगड़ा करते है। उस पर रवि कुमार ने कहा कि मैडम पहले शिकायत तो देख लो किसने शिकायत की है और किस के खिलाफ शिकायत है। तब जाकर एएसआई ने शिकायत पत्र जांचा तो पाया कि यह मामला संजौली का नही बल्कि सिमिट्री का है। वहां कोई अन्य रवि नाम का व्यक्ति है जिसके खिलाफ यह शिकायत पत्र था।

जानकारी मिली है कि इस घटना के दौरान डीएसपी सिटी दौरे पर थाने पहुंचे। उन्होंने इस मामले को शांत करवाया तथा एएसआई से समाजसेवी रवि कुमार दलित का परिचय भी करवाया। इस मामले में रवि कुमार दलित का कहना है कि पुलिस की इस प्रकार की कार्यवाही से वो मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित हुए है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिमाचल पुलिस उस समय कार्यवाही क्यों नही करती जब प्रदेश में कहीं भी जाति आधारित हिंसा और अत्याचार के मामले होते है? सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और संसद से बिल पारित होने के बाबजूद इतनी ही तेजी से पुलिस अपराधी को गिरफ्तार क्यों नही करती। क्यों जाति आधारित अपराध करने वालों के बातचीत की जाती है। क्यों हिमाचल पुलिस आपराधिक मामला और खास प्रावधानों के अंतर्गत अपराध होने पर भी समझौता करवाने की कोशिश करती है और पीड़ित लोगों को एक एफआईआर दर्ज करवाने के लिए सात से 15 दिन इंतजार करना पड़ता है।

उन्होंने डीजीपी हिमाचल प्रदेश से पुलिस की कार्यवाही सुधारने की अपील की है। ताकि भविष्य में ऐसी गलती ना हो और बिना कसूर किसी को थाने बुला कर प्रताड़ित ना किया जाए।


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