सात हजार की आबादी पर सिर्फ एक डेंटिस्ट, न डॉक्टर है न नर्स, कोरोना टेस्ट के लिए 40 किलोमीटर दूर रोहड़ू आना पड़ता है

शिमला जिला का समरकोट क्षेत्र- ग्रामीणों में कोरोना का भय क्योंकि खुद अपने खर्च पर रोहड़ू कैसे जाएं?एंबुलेंस इलाके में आ नहीं रही, बीमार हाेने पर ग्रामीण घर मेें ही दवाइयां खाते हैं, टेस्ट कराने को अस्पताल भी नहीं जा रहे हैं

रोहडू से 40 किलाेमीटर है समरकाेट क्षेत्र। यह क्षेत्र जितना खूबसूरत है, स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में उतना ही बदहाल। गांव भलून में घर के बाहर बैठे एक बुजुर्ग ने हमें देखते ही कहा, क्या तुम लाेग स्वास्थ्य विभाग से हाे। हमने जब बताया कि नहीं हम तो गांव में काेराेना के हालात और सुविधाएं देखने आए हैं तो पड़ोस में ही बैठे व्यक्ति रामचरण मेहता ने कहा कि क्या बताएं साहब, हालात खराब हैं।

समरकाेट में पीएचसी ताे है, लेकिन यहां पर न ताे नर्स हैं और न ही डाॅक्टर। काेराेना टेस्ट करवाने के लिए राेहडू अस्पताल जाना पड़ता है। रिपाेर्ट पाॅजिटिव आ गई ताे घर आने के लिए एंबुलेंस नहीं देते, इसलिए अब लाेग टेस्ट करवाने के लिए नहीं जा रहे हैं। 

वे कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां आ नहीं रही है। काेई जागरूकता नहीं हैं, गांव की सेनिटाइजेशन पंचायताें के प्रतिनिधि करवाते हैं, लेकिन मात्र अाैपचारिकताएं ही पूरी हाेती है। इसके बाद हम समरकाेट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। 

ये है हकीकत: नाम: पीएचसी समरकाेट

  • ​​​​​​​वर्तमान स्टाफ: एक डेंटिस्ट, एक फार्मासिस्ट
  • सेंक्शन पाेस्ट: 1 डाॅक्टर, 3 स्टाफ नर्स, 1 लैब अटडेंट
  • दवाइयां: सिर्फ पैरासिटामाेल के अलावा कैल्शियम की।

कोरोना पॉजिटिव आने पर घर में ही रहकर दवाइयां खाते हैं 

वीनू मेहता नाम के एक व्यक्ति से हमने पूछा काेराेना काे लेकर क्या स्थिति है गांव की एंटीजन टेस्ट हाे रहे हैं या नहीं, वैक्सीनेशन लगा रहे हैं कि नहीं। वीनू मुस्कुराते हुए बाेले, किस चीज का टेस्ट। हम काेराेना के टेस्ट नहीं करवा रहे हैं। हमने पूछा क्याें, जिनकाे काेराेना के लक्षण हैं, उन्हें ताे करवाने चाहिए। वे बाेले- करवाने के लिए ताे करवा लें, लेकिन राेहडू काैन जाएगा। यहां से काफी दूर हैं।

जाे बीमार हाेते हैं, वे घर मेें ही दवाइयां खाते हैं। काेराेना का टेस्ट करवाने के लिए टीमेें आनी चाहिए, वे नहीं आ रही हैं। वैक्सीन ताे कुछ दिन पहले पीएचसी समरकाेट में लगाई थी, लेकिन आने वाले दिनाें में लगाते हैं या नहीं, इसका कुछ कह नहीं सकते। काेराेना से ज्यादा भमनाेली गांव में लाेगाें काे फसल की चिंता सता रही है।

यहां के लोग कहते हैं कि बीते दिनाें अप्रैल में हुई बर्फबारी और ओलावृष्टि ने बागवानाें की कमर ताेड़ दी है। काेराेना के इस संकट में अगर फसल नहीं हुई ताे दिक्कतें खड़ी हाेगी। काेराेना संकट के कारण भूखमरी के हालात हाेने वाले हैं। अगर सरकार समय से नहीं जागी ताे हालात बदतर हाे जाएंगे।

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