अस्थि विसर्जन से खुली मौतों की पोल; कालेश्वर महादेव में 22 दिन में 782, बैजनाथ में 208, तत्तापानी में 200 अस्थि विसर्जन


RIGHT NEWS INDIA


कोरोना के इस दानव ने हिमाचल के तीर्थ स्थलों और श्मशानघाटों की जो भयानक तस्वीर पेश की है, उसने मौत के सरकारी आंकड़ों की बोलती बंद कर दी है। पहली मई से 28 मई के बीच सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 1520 कोरोना पीडि़तों की मौत हुई। इस पीरियड के इन आंकड़ों की उल्टी गवाही पेश की गरली से रक्षपाल शर्मा, कांगड़ा से राकेश कथूरिया, बैजनाथ से चमन डोहरू, चामुंडा से बॉबी गोस्वामी, त्रिवेणी (सांढा पत्तन) से राजेश राणा, तत्तापानी से नरेंद्र शर्मा, बिलासपुर से अनिल पटियाल, पांवटा से सूरत पुंडीर और सोलन से सौरभ शर्मा ने 28 दिन की कड़ी नजर के बाद कोरोना से हो रही मौतों के जो आंकड़े पेश किए हैं, वे दिल दहलाने वाले हैं।

कांगड़ा जिला के गरली और चंबापत्तन पर ऐतिहासिक और पौराणिक देवस्थल कालेश्वर महादेव में छह मई से 27 मई तक 782 मृतकों की अस्थियां विसर्जित की गईं।

स्थानीय निवासी राजेश कुमार बताते हैं कि उनका कार्य अस्थि विसर्जन के लिए आने वालों का पंजीकरण करना है और इस अवधि में 782 मृतकों की अस्थियां यहां विसर्जित हुई हैं। ध्यान रखें कि यह मंदिर व्यास नदी के तट पर है और पांडव काल का है। कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना जिलों की इस स्थल पर अगाध श्रद्धा है। राजेश के मुताबिक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को 50 से 70 और मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को 30 से 50 मृतकों की अस्थियां यहां प्रवाहित हो रही हैं। बैजनाथ की रिपोर्ट बताती है कि यहां एक माह में 288 मृतकों की अस्थियां प्रवाहित हुईं। हर रोज 7 से 10 मृतकों की अस्थियां यहां खीर गंगा (बिनवा) में प्रवाहित हो रही हैं। ऐतिहासिक शिव मंदिर के साथ यहां घाट मंडी और कांगड़ा जिला के लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिर ट्रस्टी अनिल शर्मा का कहना है कि सामान्य दिनों में यहां हफ्ते में इक्का-दुक्का लोग अस्थि विसर्जन को आते थे, पर आजकल की तस्वीर भयानक है। प्रतिदिन 7 से 10 लोग अस्थि विसर्जन को यहां पहुंच रहे हैं। हालांकि यहां अस्थि विसर्जन के लिए पंडित आदि उपलब्ध नहीं हैं। कांगड़ा के बाणगंगा और गंगभैरों में भी औसतन तीन लोगों की अस्थियां विसर्जित हो रही हैं। ऐसी ही स्थिति श्री चामुंडा जी तीर्थ स्थल की है। यहां भी दो से तीन मृतकों की अंतिम क्रिया हो रही है। मंडी और शिमला जिला की सीमा पर ऐतिहासिक स्थल तत्तापानी में एक माह में 200 मृतकों की अस्थियां विसर्जित हुई हैं।

औसतन यहां भी छह से सात लोगों की अस्थियां हर दिन प्रवाहित की जा रही हैं। यहां भी मंडी, शिमला और सोलन के लोग पहुंचते हैं। मंडी जिला के सांढापत्तन स्थित त्रिवैणी में दो हफ्ते में चार मृतकों की अस्थियोंं का विसर्जन हुआ। गुरु नगरी पांवटा की तस्वीर कुछ अलग है। यहां यमुना नदी में हर दिन एक अस्थि विसर्जन हो रहा है। बिलासपुर की रिपोर्ट बता रही है कि यहां के लोग अस्थि विसर्जन के लिए केवल हरिद्वार में मां गंगा के द्वार ही जा रहे हैं। एक माह में यहां लगभग 100 पास हरिद्वार के लिए अप्लाई हुए। उधर, सोलन से हमारे संवाददाता के अनुसार यहां भी लोग अस्थि विसर्जन केवल हरिद्वार में ही करते हैं और हर दिन दो से तीन आवेदन उपमंडलों में पहुंच रहे हैं। चंबा में तो लोगों ने दो-दो माह से अस्थियां घरों में ही रखी हैं, ताकि हालात सामान्य होने पर हरिद्वार जाया जा सके। ऊना में अस्थियां हरिद्वार में ही प्रवाहित करने की आस्था है। यहां भी हर दिन पांच से सात मौतों की पुष्टि हमारे सूत्र करते हैं। कुल्लू, सिरमौर और लाहुल की रिपोर्ट वांछित है। आकलन किया जा सकता है कि प्रदेश में कोरोना काल में मौत का आंकड़ा कितना खतरनाक है। सरकारी आंकड़े वे हैं, जो अस्पताल में हो रही है या लोग सूचित कर रहे हैं। बहुत सी मौतों की रिपोर्ट नहीं हो रही है। अधिकारिक 1520 से दोगुनी मौतें राज्य में हो चुकी हैं।


Advertise with US: +1 (470) 977-6808 (WhatsApp Only)


Please Share this news:
error: Content is protected !!