भरमौर में मरीज को पीठ पर उठा कर सड़क तक पहुंचाया, यहां नही है एक भी स्वास्थ्य केंद्र

भरमौर विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत गाण के लोग आजादी 72 साल बाद भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। इतना ही नहीं, पंचायत में अभी तक स्वास्थ्य केंद्र भी नहीं खुल पाया है। इसकी वजह से ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। बुधवार को पंचायत के छतकड़ गांव की बुजुर्ग बटो देवी को पीठ और घुटनों में दर्द हुई।

महिला को उपचार के लिए उसका बेटा भोट उसे अस्पताल लेकर गया लेकिन, गांव से अस्पताल की दूरी तय करने के लिए बेटे को एड़ी-चोटी की मेहनत करनी पड़ी। आठ किमी तक अकेले बेटे के लिए अपनी माता को पीठ पर उठाकर अनेरा पहुंचाना मुश्किल था, इसलिए अन्य रिश्तेदारों ने भी उसकी मदद की। हालात यह हैं कि पंचायत के दस गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं।

इन गांवों में बीमार होने वाले मरीजों को तीमारदार पीठ पर उठाकर आठ किमी दूर अनेरा सड़क तक पहुंचाते हैं। यहां से उन्हें निजी वाहन या एंबुुलेंस के जरिये स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना पड़ता है। इतनी लंबी दूरी तय करते समय कई बार गंभीर रूप से बीमार मरीज बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।

हैरानी इस बात की है कि जहां प्रदेश सरकार विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है वहीं जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र की एक पंचायत को 72 सालों से सड़क और स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से सरकार के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। ग्रामीण कई बार ग्रामसभा में भी सड़क बनाने के लिए प्रस्ताव पारित कर चुके हैं लेकिन अभी तक उन प्रस्तावों पर कोई गौर नहीं किया गया है। इसकी वजह से लोग आज भी अपने मरीजों को पीठ पर उठाने के लिए मजबूर हैं।

अब नाराज ग्रामीण आंदोलन की राह अपनाने की योजना बना रहे हैं। पंचायत उपप्रधान काका ठाकुर ने बताया कि उनकी पंचायत आजादी के बाद भी सड़क से नहीं जुड़ पाई है। पंचायत को सड़क से जोड़ने के लिए वह कई बार सरकार के नुमाइंदों से भी मिल चुके हैं। लेकिन आज दिन तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले।


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