दावों की खुली पोल,सड़क ना होने के कारण 3-4 किमी उठा कर सड़क तक पहुंचाई मरीज

सरकार हर गांव को सड़क से जोड़ने के दावे करती है लेकिन जिले के कई गांव अब भी सड़क सुविधा से महरूम हैं। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को मीलों पैदल सफर तय करना पड़ता है। विशेषकर बीमारी की हालत में मरीजों को पालकी में बिठाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। ऐसे ही करीब आधा दर्जन गांव जिले की ढलोग पंचायत के भी हैं, जहां सड़क न होने के कारण लोगों को 3 से 4 किलोमीटर पैदल सफर करने को विवश होना पड़ रहा है। इससे सरकार के हर गांव को सड़क से जोडऩे के दावों की पोल खुल रही है। शुक्रवार को ढलोग पंचायत के समलैटा गांव की इच्छरो देवी पत्नी जैमल की तबीयत बिगड़ गई। वह अस्थमा से पीड़ित है। तबीयत बिगड़ने पर उसे पालकी में उठाकर कम से कम 3-4 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर सड़क तक पहुंचाया गया।

निजी भूमि विभाग के नाम करवाई, फिर भी नहीं बनी सड़क

ग्रामीणों का कहना है कि भगौता-1, भगौता-2, समलैटा-1 व समलैटा-2 के लोगों ने लगभग 3-4 साल पहले ही निजी भूमि लोक निर्माण विभाग के नाम करवा दी है, इसके बावजूद अब तक यहां पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इन गांवों में कोई बीमार होता है तो उसे 3-4 किलोमीटर पालकी द्वारा चढ़ाई चढ़कर सड़क तक पहुंचाया जाता है। यहां पर न तो एम्बुलैंस की सुविधा है और न ही फायर ब्रिगेड की।

हिमाचल सरकार बहुत ही निकम्मी

स्थानीय निवासियों ने कहा कि हिमाचल सरकार बहुत ही निकम्मी है। यहां के लोग हिमाचल सरकार के काम से खुश नहीं हैं। अगर इस दौरान कोई अप्रिय घटना हो जाती है तो उसकी जिम्मेदार सरकार ही होगी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि जल्द इन गांवों को सड़क से जोड़ा जाए। ऐसा न होने पर उसे लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

क्या बोले विभाग के अधिकारी

वहीं लोक निर्माण विभाग के जेई विपुल पुंज ने बताया कि अभी 2 महीने पहले इसका सर्वे करके डीपीआर बनाकर सरकार को भेजी है। जैसे ही इसकी फोरैस्ट क्लीयरैंस हो जाएगी सड़क का काम शुरू हो जाएगा।

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