करसोग के इस गांव में आम जनता को पिलाया जा रहा है गंदा पानी, प्रधान ने कहा, काम रोको, अन्यथा हम जाएंगे कोर्ट


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उपमंडल करसोग का गांव नांज भंयाकर गर्मी की चपेट में है। हाल ही में गांव को कोरोना को रौद्र रूप भी देखना पड़ा है। ऊपर से खड्ड में सड़क का मलबा गिराए जाने से एक पेय जल स्रोत सूख गया है और दूसरे पर सूखने के बादल मंडरा रहे हैं। जिस के चलते आज खुद दर्जनों ग्रामीण लोक कृषि वैज्ञानिक नेक राम शर्मा और गांव के प्रधान नरायण ठाकूर, तेजेंद्र शर्मा आदि के नेतृत्व में खड्ड पर बने जल शक्ति विभाग के वाटर टैंक पर पहुंचे और साफ-सफाई की। पानी के टैंक बुरी तरह से खराब हालात को देख ग्रामीणों में तीव्र आक्रोश है। उन्होंने खुद ही टैंकों की सफाई की जिसमें कई-कई ईंच गाद जमी हुई थी।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जल शक्ति विभाग के अधिकारी इनका संज्ञान नहीं ले रहे हैं। जनता के टैक्स से तनख्वाह ले रहे हैं लेकिन हमें गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हर घर नल योजना और स्वच्छ पेय जल की गारंटी के वायदे करने वाली सरकार नांज गांव में विफल दिखाई दे रही है।

ग्राउंड रिपोर्ट वीडियो

लोक कृषि वैज्ञानिक नेकराम शर्मा ने कहा है कि हम सीमना खड्ड पर खड़े हैं, ये हमारा पीने के पानी का स्रोत, लेकिन बहुत दुख की बात है कि पीने के लिए पानी सीधा खड्ड से लिया गया, जबकि फिल्टर टैंक होते हुए भी उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा। जिस कारण डायरिया जैसे बिमारियां होती है। हमें स्वच्छ जल की बजाए गंदा जल प्रदान किया जा रहा है। हमने यहां पर पांच-छह फिल्टर टैंक यहां देखे जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा, जिनकी सफाई नहीं हो रही। उन्होंने सरकार से अपील की है कि सरकार संज्ञान लें, सख्ती से विभाग को निर्देश दिये जाएं। पानी के स्रोत की ठीक व्यवस्था हो, फिल्टर टैंक बनने के बावजूद खाली पड़े हैं, जर्जर हालात में है, इस खड में कई टैंक ऐसे खाली पड़े हुए हैं। हमें लगता है अधिकारी यहां नहीं आते, अगर आते हैं तो ऐसे हालात क्यों हैं। इनकी सफाई की जाए ताकि लगभग 5000 लोगों को साफ पानी पहुंचे।

वहीं ग्राम पंचाय प्रधान नारायण ठाकुर चेतावनी देते हुए कहा कि पीडब्लूडी निर्माण कार्य की वजह से हमारा एक पानी का स्रोत खत्म हो गया है। दूसरे पर मलबा गिराया जा रहा है। अगर ऐसे हुआ तो हमारे गांव प्यासे मर जाएंगे। हम उनको कहां से पानी उपलब्ध करवाएंगे। तुरंत दोनों विभागों को अपना काम रोकना चाहिए या फिर डंपिंग साईट बनाकर काम करें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम कोर्ट जाएंगे और विभाग पर कार्रवाई की जाएगी।


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