विधायक देखेंगे मृतकों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था, वित्त आयोग की राशि से सैनिटाइज होंगी पंचायतें

हिमाचल प्रदेश में कोरोना से मरने वालों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था स्थानीय विधायक देखेंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधायकों से आग्रह किया कि वे स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर कोरोना से मरने वालों के पारिवारिक सदस्यों के साथ उचित संपर्क बनाएं, ताकि मृतकों का अंतिम संस्कार केंद्र के दिशा-निर्देशों और प्रोटोकॉल के तहत हो सके।

इस संबंध में 12 मई, 2021 को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कांगड़ा जिले के रानीताल में कोरोना से मां की मौत होने के बाद एक युवक द्वारा शव कंधे पर उठाकर श्मशान घाट तक अंतिम संस्कार के लिए ले जाने वाला वीडियो वायरल होने के बाद प्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है।

मुख्यमंत्री ने विधायकों से मृतक व्यक्ति के परिवार से संपर्क बनाने का आग्रह किया, ताकि मुश्किल घड़ी में उनका मनोबल बढ़े। सीएम ने कहा कि उपायुक्त सुनिश्चित करें कि शोक संतप्त परिजनों को मृतक के अंतिम संस्कार में जिला प्रशासन का पूरा सहयोग और सहायता मिले।

शहरी क्षेत्रों में संबंधित नगर आयुक्त, शहरी स्थानीय निकायों के कार्यकारी अधिकारी और सचिव नोडल अधिकारी होंगे। ये अधिकारी अस्पतालों से समन्वय बनाकर काम करें। ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी नोडल अफसर होंगे। मृतक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए पीपीई किट, डेड बॉडी बैग, डिस्इंफेक्टेंस, सैनिटाइजर, वेस्ट डिस्पोजेबल बैग आदि संसाधन प्रदान करने चाहिएं।

इसके लिए अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को उपरोक्त सामग्री दी जाएगी। खंड विकास अधिकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, पंचायतों, पंचायत सचिवों और पटवारियों के साथ समन्वय बनाएं। मृतक के परिजनों को संकट में सहायता के लिए शहरी निकायों के अधिकारियों, कार्यकारी अधिकारियों, सचिवों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित पंचायत सचिवों और पटवारियों से संपर्क करना चाहिए।

फील्ड में उतारे अफसर हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए पंचायतों को एक्टिव मोड में लाया गया है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पंचायत प्रतिनिधियों को अपने-अपने इलाकों में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए थे। अफसर भी फील्ड में उतार दिए हैं। पंचायत प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को तालमेल बैठाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद ग्रामीण विकास विभाग के अफसर हरकत में आ गए हैं। पंचायत प्रतिनिधियों, बीडीओ से लेकर जिलों के उपायुक्तों सहित कई अन्य अधिकारियों से कोरोना के खिलाफ सामूहिक रूप से लड़ने को कहा है।

कोरोना का दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक है। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों और क्षेत्र के अधिकारियों से साफ कहा है कि 11 से 15वें वित्तायोग की खर्च न हुई धनराशि से स्वच्छ भारत अभियान के तहत पंचायत क्षेत्रों में जन भागीदारी से सैनिटाइज किया जाए। पंचायतों में कोरोना संक्रमितों और उनके परिजनों की सुध भी ली जाए। सरकार ने पंचायतों को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए पचीस-पचीस हजार रुपये की राशि देने का भी फैसला लिया है। पंचायतें इस राशि का दुरुपयोग न करें। खर्चे का लेखा-जोखा रखने के भी सरकार ने लिखित आदेश दिए हैं।

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