झंडी विवाद; विधायकों को लॉकडाउन में बाहर निकलने में हो रही थी परेशानी, इसलिए लगेगी झंडी


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हिमाचल में विधायकों को झंडी देने का मामला तूल पकड़ गया है। कांग्रेस विधायक गाड़ी पर झंडी लगाने से इन्कार कर रहे हैं। अपनी ही सरकार का खुला विरोध भाजपा के विधायक नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन अंदरुनी तौर पर फैसले पर सवाल जरूर उठा रहे हैं। कांग्रेस वरिष्ठ नेताओं से लेकर युवा नेताओं ने झंडी लगाने से इन्कार कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह ने झंडी लेने से साफ इन्कार कर दिया है। माकपा विधायक राकेश सिंघा ने भी सरकार के फैसले का विरोध किया है। इनका तर्क है कि कोरोना काल में सरकार को लोगों की जान बचानी चाहिए।

वहीं भाजपा के कुछ विधायक भी फैसले को सही नहीं मानते हैं, लेकिन अपनी सरकार के फैसले के खिलाफ कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। इनका कहना है कि फैसले को बाद में भी लिया जा सकता है। अब सवाल ये हैं कि सरकार ने कैबिनेट में ये प्रस्ताव किसकी मांग पर लाया था। जबकि सभी फैसले की कम से कम टाइमिंग से नाराज ही हैं।

लंबे समय से विधायक ही उठा रहे थे मांग

भाजपा विधायक दल की बैठक हो या फिर विधानसभा के सत्र के दौरान भाजपा व कांग्रेस विधायकों ने ट्रैफिक में फंसने का मसला उठाया था। इसमें तर्क दिया गया था कि कार्यक्रम से लेकर लोगों के बीच में अतिरिक्त समय लगता है। इसलिए झंडी की सुविधा तो दी जानी चाहिए। अधिकारियों से लेकर जिलास्तर के अधिकारियों तक को सुविधा है तो विधायकों को क्यों नहीं। पिछले लाकडाउन के दौरान विधायकों को बाहर निकलने तक की समस्या का सामना करना पड़ा था।

भाजपा व कांग्रेस विधायकों की लंबित थी मांग : कश्यप

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप ने सरकार के फैसले को सही बताया। उन्होंने बताया कि विधायक जनसेवा के लिए जाते हैं तो सड़क पर पास लेने में परेशानी होती है। गाड़ी पर झंडी लगी होने से जल्द ही लोगों तक पहुंच सकेंगे। भाजपा व कांग्रेस के विधायकों की मांग पर फैसला लिया है। अब कुछ विधायक इन्कार कर रहे हैं। सरकार की मंशा विधायकों को ज्यादा समय सफर की बजाय जनसेवा के लिए मिल सके। इसलिए ही झंडी देने का फैसला लिया है।


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