हिमाचल के किसानों के लिए नहीं लगा मक्की आधारित उद्योग

हिमाचल प्रदेश में लाखों किसानों के लिए अभी तक प्रदेश में मक्की पर आधारित कोई उद्योग नहीं लगा है। प्रदेश में हर साल करीब एक लाख हेक्टेयर जमीन में मक्की पैदा होती है। मक्की की मंडी तलाशने के लिए किसानों को पड़ोसी राज्यों का रुख करना पड़ता है। किसानों के लिए प्रदेश में ही अच्छे दामों पर फसल बेचनी की सुविधा नहीं है। पिछले साल भी पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में प्रदेश के किसानों को मक्की के अच्छे दाम नहीं मिले थे।प्रदेश में मक्की पर आधारित उद्योग स्थापित करने की मांग लंबे समय उठ रही है, लेकिन आज तक ऐसा उद्योग नहीं लगाया जा सका है। यही कारण है कि आज भी प्रदेश के किसानों को मक्की औने पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है। प्रदेश में पैदा होने वाली मक्की का अधिकांश भाग पॉलिट्री फार्म में मुर्गों की फीड के रूप में इस्तेमाल होता है। मक्की के खरीदार पंजाब और हरियाणा से आते हैं, जिससे किसानों को दाम भी पूरे नहीं मिलते।

राज्य के कृषि निदेशक नरेश ठाकुर ने कहा कि पिछली बार किसानों को मक्की के दाम अपेक्षाकृत कम मिले थे। मक्की के दाम 7-8 सौ रुपये प्रति क्विंटल मिले थे। प्रदेश में मक्की पर आधारित उद्योग स्थापित करने की जरूरत है और तभी जाकर किसानों को मक्की के अच्छे दाम मिलेंगे।

पिछले साल 800 रुपये क्विंटल बिकी मक्की
प्रदेश के मक्की उत्पादक किसानों पर पिछले साल कोरोना और बर्ड फ्लू की मार पड़ी थी। जिन किसानों को 1500 रुपये क्विंटल मक्की का दाम मिलता था, उन्हें सिर्फ 800 रुपये क्विंटल दाम बड़ी मुश्किल से मिले। पिछले साल पॉलिट्री फार्म का कारोबार भी ठप था।

हिमाचल में 55 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि
प्रदेश में कुल 55 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इसमें 5 लाख हेक्टेयर में कृषि गतिविधियां की जाती हैं। इसमें से एक लाख हेक्टेयर भूमि में सर्फ मक्की की पैदावार किसान करते हैं।

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