चांसलर के जबाब से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति सिकंदर मुशीबत में

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कुलपति की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका में बुधवार को प्रदेश के राज्यपाल और प्रदेश विश्वविद्यालय के चांसलर की ओर से जवाब दायर किया गया। जवाब में कहा गया है कि कुलपति की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी इस बात से अनभिज्ञ थी कि सिकंदर कुमार कॉस्ट ऑफ कल्टीवेशन स्कीम में निदेशक के पद का अतिरिक्त कार्यभार बतौर एसोसिएट प्रोफेसर देख रहे थे।

सर्च कमेटी को दिए फॉर्म में इसका उल्लेख नहीं किया गया था। प्रो. सिकंदर ने अपने आवेदन में नोशनल एवं वास्तविक पदोन्नति के बारे में भी विशेष रूप से नहीं लिखा था, जिस कारण यह तथ्य सर्च कमेटी के ज्ञान में नहीं था।

चांसलर की ओर से कहा गया है कि विश्वविद्यालय ही प्रोफेसर सिकंदर की शैक्षणिक योग्यता व अनुभव के बारे में अच्छे से बता सकता है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी व न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई।

इस दौरान प्रदेश सरकार ने जवाब दायर करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। उधर, चांसलर की ओर से दिए गए लिखित जवाब में कहा गया है कि कुलपति सिकंदर कुमार ने अपने आवेदन में खुद को कॉस्ट ऑफ कल्टीवेशन स्कीम का फुल टाइम निदेशक बताया, जबकि प्रार्थी का आरोप है कि उस समय सिकंदर कुमार बतौर एसोसिएट प्रोफेसर ही निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे थे।

चांसलर की ओर से दिए गए जवाब के तीसरे प्वाइंट में लिखा है कि जो व्यक्ति कुलपति जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए आवेदन करता है तो उसके आवदेन को आमतौर पर सही माना जाता है। ऐसी उम्मीद होती है कि इस प्रतिष्ठित पद के लिए आवेदन करने वाला शिक्षाविद् जो भी तथ्य पेश करेगा, वे सही ही होंगे। चांसलर के जवाब में यह भी कहा गया है कि यूजीसी के नियमों के तहत ही नियुक्ति की है। प्वाइंट नंबर 11 में लिखा गया है कि जब सिकंदर कुमार निदेशक के पद पर थे तो उस समय एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर वह विवि में कार्यरत थे।

प्रार्थी का आरोप: प्रतिवादी ने अनुभव के गलत तथ्य देकर चयन कमेटी को किया गुमराह
उधर, प्रार्थी धर्मपाल ने याचिका में आरोप लगाया गया है कि वाइस चांसलर की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध की गई है। याचिका के माध्यम से अदालत को बताया गया कि प्रतिवादी वाइस चांसलर को यूजीसी द्वारा जारी रेगुलेशन के तहत 19 मार्च, 2011 को प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत किया गया था। 29 अगस्त, 2017 को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। प्रतिवादी ने चयन कमेटी को गुमराह करते हुए अपने आवेदन में अनुभव के बारे में गलत तथ्य दिए। प्रार्थी ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि प्रतिवादी को आदेश दिए जाएं कि वह एचपीयू के वाइस चांसलर की नियुक्ति के लिए अपनी योग्यता अदालत को बताए और यदि उसकी योग्यता यूजीसी के रेगुलेशन के विपरीत पाई जाती है तो उस स्थिति में उसकी नियुक्ति रद्द की जाए।

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