धरने के पांचवा दिन; नारी शक्ति के साथ एसीसी कंपनी के गेट पर डटी बिटिया फाउंडेशन की अध्यक्ष

आज हिमाचल के बरमाणा में चल रहा बिटिया फाउंडेशन के धरना पांचवे दिन में प्रवेश कर गया है और अभी तक ना तो प्रशासन की ओर से कोई विस्थापितों की समस्याएं सुनने आया है और ना ही सरकार का कोई नेता यहां पहुंचा है।जानकारी के मुताबिक बिटिया फाउंडेशन की अध्यक्ष सीमा सांख्यान के साथ बरमाणा की नारी शक्ति भी पूरी ताकत से धरने पर डटी हुई है। जबकि आए दिन बारिश, आंधी और तूफान की स्थिति बनी हुई है। यह बेहद चिंतनीय विषय है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार और बिलासपुर प्रशासन को महिलाओं की स्थिति का जरा भी ख्याल नही है।

बिटिया फाउंडेशन के अध्यक्ष सीमा संख्यान ने बताया कि विस्थापितों की मांगों को लेकर दिए जा रहे इस धरने को आज पांच दिन होने के बाबजूद ना जिला प्रशासन को और ना ही एसीसी सीमेंट कंपनी के प्रबंधन को इन महिलाओँ की जान मान की कोई फ़िक्र नहीं है। पांच दिनों से यह महिलाएँ यहाँ आंधी-तूफान, बारिश में डटी है। रात को NH 21 के साथ एसीसी मेन गेट के सामने यह धरना चल रहा है, जहाँ से रोज हजारों गाड़ियां आती जाती है। हजारों ड्राईवर वहां रातों को घूमते रहते है लेकिन प्रशासन को महलाओं की कोई चिंता नहीं है।

सीमा संख्यान ने बताया कि अब हमें कोई आंधी, तूफ़ान और बारिश अपना हक़ लेने से नहीं रोक सकती। अब कुछ भी हो जाए, लेकिन जो हमारी मांगे है उनको हम ले कर ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी बताया है, एसीसी सीमेंट कंपनी ने बरमाणा, पंजगाईं, धौणकोठी और यहाँ की साथ लगती पंचायतों से कूड़े के भाव जमीनें खरीद ली। जिसके मुआवजे से न तो और जमीन ही खरीदी गयी न ही घर बना पाए। कुछ लोगों को छोड़ कर ना ही यहाँ के लोगों को नौकरी दी जाती है ना ही कोई और रोजगार रहा यहाँ के लोगों के पास। जो थोड़ी बहुत जमीने  लोगों के पास बची है वहां जब लोगों ने अपने घर बनाये और  खेती करने के जाना पड़ा तो एसीसी सीमेंट कंपनी के पदाधिकारियों ने इन  लोगों के रास्ते ऊँची दिवार लगा कर बंद कर दिए हैं। आज यहाँ के नौजवान बच्चे पढ़ लिख कर अपने घरों में बैठे है। वादे के अनुसार एसीसी कंपनी की ओर से उनको कोई रोजगार नहीं दिया जा रहा है। जबकि बाहरी राज्यों के लोगों को रोजगार दिया जाता है। इसी वजह से आज के नौजवान नशे की चपेट में आ रहे है।  

उन्होंने आगे कहा कि मैंने खुद देखा है, एसीसी सीमेंट कंपनी में कुछ दिनों पहले लगभग 10 से  15 लड़कियों की भर्ती एसीसी सीमेंट कंपनी ने की। लेकिन एक भी स्थानीय लड़की को रोजगार नही दिया गया। कंपनी स्थानीय लड़कियों को छोड़ो हिमाचल की लड़कियों को भी रोजगार नही देती है। उन्होंने कंपनी की इस नियत पर सवाल उठाते हुए सवाल पूछा कि क्या यहाँ की लड़कियों के पास योग्यता नहीं है? क्या सिर्फ बाहरी राज्यों की लड़कियाँ, एसीसी सीमेंट कंपनी के पदाधिकारियों के जान पहचान वालों की लड़कियां या लड़के काबिल है? प्रशासन एवं एसीसी सीमेंट कंपनी के पदाधिकारियों को इसका जबाब देना ही पड़ेगा। आज कंपनी से लोग रिटायर हो रहे है, लेकिन उनके बच्चों को नौकरी नहीं है। यह अनदेखी बहुत देख ली, अब आगे हम कंपनी की मनमानी नहीं सहेंगे।

उन्होंने सीमेंट की कीमतों पर सवाल उठाते हुए मांग की कि बरमाणा में सीमेंट महंगा है और बाकी जगहों पर सस्ता है, एसीसी सीमेंट कंपनी के विस्थापितों एवं प्रभावितों को आधे दाम पर एसीसी सीमेंट मिलना चाहिए। कंपनी से बढ़ते प्रदूषण पर बात करते हुए सीमा संख्यान ने कहा कि एसीसी सीमेंट कंपनी से इतना ज्यादा खतरनाक प्रदुषण निकलता है जिससे यहाँ के विस्थापित एवं प्रभावित जनता भयानक बिमारियों की चपेट में आ रही है। अगर आज भी यहाँ की जनता का सर्वेक्षण करवाया जाए तो आधे से ज्यादा लोग भयानक बीमारियों की चपेट में निकलेंगे।

उन्होंने कंपनी को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं प्रशासन और एसीसी सीमेंट कंपनी के पदाधिकारियों को यह चेतावनी देना चाहती हूँ कि अभी भी वक़्त है हमारी मांगे मान लो और ये मांगे कोई बहुत बड़ी नहीं है नहीं तो इसका भुगतान आपको बहुत महंगा पड़ेगा।
आज इस धरने में  उपप्रधान अवदेश भारद्धाज,  कंचन, बेबी खान, माया, रजनी, कनिका, सुनीता, मंजू, स्वेता, योगिता, मोहन, नेहा, श्याम लाल, वरिंदर, शिवम्, मंजू शर्मा, जाहीद, कसल्या, बंदना, सुमन, नरेश, विवेक आदि उपस्थित रह कर इस धरने को मजबूत किया ।

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