पंचायत सचिव द्वारा सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने पर मुख्यमंत्री संकल्प सेवा में शिकायत दर्ज

हिमाचल की पंचायतों में कई सचिवों की मनमानियां और तानशाही रुकने का नाम नही ले रही। पंचायत कामों में भ्रष्टाचार चरम पर है तो इसका मुख्य कारण पंचायत में बैठे कुछ भ्रष्टाचारी सचिव ही है। अन्यथा पांच और आठ पास प्रधानों को क्या पता कि सरकारी कामों में कैसे भ्रष्टाचार किया जा सकता है। इन कुछ भ्रष्टाचारी सचिवों के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बाबजूद उच्च अधिकारी ना इनको निलंबित करते है और ना ही इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाते है। जोकि अपने आप में पंचायत प्रणाली पर एक गंभीर सवाल है।

ताजा मामला चम्बा की पंचायत नैनीखड्ड से निकल कर सामने आया है। जहां पंचायत सचिव ने दो परिवारों को एक ही परिवार रजिस्टर नकल में दिखा दिया। जबकि एक परिवार में दो परिवार को दिखाना कानून का उल्लंघन है। इस बारे कुछ समय पहले राइट न्यूज़ इंडिया की ओर से खबर लगाने के बाद पंचायत सचिव का दिमाग टिकाने आया तो उसने दूसरे परिवार के लोगों के आगे “परिवार विभाजित” लिख दिया। लेकिन फिर भी परिवार को अलग अलग नही दर्शाया।

सचिव द्वारा जारी पहली परिवार नकल

बता दें कि नैनीखड्ड के एक परिवार के बेटे की शादी हो चुकी थी और उसका परिवार सालों पहले अलग हो चुका है। उस समय पंचायत द्वारा दी गई परिवार नकल में बेटे और उसके को परिवार नही दर्शाया गया है। कुछ समय बाद बेटे की मौत हो गई और उसके बाद से पंचायत सचिव ने एक बार फिर बेटे के परिवार को महिला के परिवार में दर्शना शुरू कर दिया। लेकिन क्यों, इस सवाल का जबाब आज तक नही मिल पाया है।

आप लोगों को जानकर हैरानी होगी कि पंचायत सचिव इतना ज्यादा तानाशाही करता है कि ना तो कोई ग्राम सभा हुई, ना किसी उच्च अधिकारी या न्यायालय ने आदेश दिए। लेकिन फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में परिवर्तन कर दिया गया। परिवार में डाले गए लोगों के आगे “परिवार विभाजित” लिख दिया गया। पीड़ित परिवार से मिली जानकारी के मुताबिक पंचायत सचिव ने उनको बुरी तरह प्रताड़ित कर रखा है और अब वह पहले दी गई परिवार नकल को वापिस मांग रहा है तथा परिवार पर दबाब बना रहा है।

सचिव द्वारा जारी की गई दूसरी परिवार नकल

पीड़ित परिवार ने संबंधित मामले में मुख्यमंत्री संकल्प सेवा में शिकायत कर दी है तथा मांग की है पंचायत सचिव के खिलाफ सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करने के लिए आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए और उनको न्याय दिलाया जाए।

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