Haryana News: रेवाड़ी जिले के गांव कंवाली के एक प्रगतिशील किसान को देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक मिला है। यशपाल खोला को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है[citation:3][citation:4]। वे 25 से 28 जनवरी तक राष्ट्रपति भवन के राजकीय मेहमान रहेंगे और परेड में शामिल होंगे[citation:1]। प्राकृतिक खेती में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति स्वयं उन्हें सम्मानित करेंगी[citation:6]।
यह निमंत्रण राष्ट्रपति भवन से एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से भेजा गया था। डाक विभाग के अधिकारियों ने इसे यशपाल के घर पहुंचाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के अनुसार उन्हें अपनी पत्नी अनीता कुमारी के साथ पहले दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तक स्वयं पहुंचना होगा। वहां से राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा और ठहरने की सारी व्यवस्था सरकार करेगी।
पिता की दुखद मौत ने बदली जीवन की दिशा
यशपाल खोला के इस सम्मान के पीछे एक संघर्ष और दुख की गहरी कहानी है। उन्होंने प्राकृतिक खेती की शुरुआत साल 2014 में की थी। लेकिन साल 2018 में उनके पिता विजय पाल का कैंसर से निधन हो गया। इस दुखद घटना ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने महसूस किया कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है।
इसी अनुभव ने उन्हें पूरी तरह से प्राकृतिक और ‘जहर मुक्त’ खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ठान लिया कि अब वह केवल स्वच्छ और सुरक्षित अन्न का ही उत्पादन करेंगे। उनका यह निजी संकल्प आज एक राष्ट्रीय सम्मान का कारण बना है। उनकी यह यात्रा हर किसान के लिए प्रेरणा है।
अकेले नहीं, हजारों किसानों को बनाया साथी
यशपाल खोला की सफलता सिर्फ अपने खेत तक सीमित नहीं रही। उन्होंने एक बड़े रकबे को प्राकृतिक खेती में बदलने में अहम भूमिका निभाई है। विभिन्न कृषि संस्थानों के साथ मिलकर उन्होंने दूसरे किसानों को भी इस ओर प्रेरित किया है। आज उनके साथ 2500 से अधिक किसान जुड़ चुके हैं और प्राकृतिक तरीके से खेती कर रहे हैं।
जिला उपायुक्त अभिषेक मीणा ने उनके काम की सराहना करते हुए इसे जिले की बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यशपाल ने रेतीले इलाके में बिना रसायन के बड़े रकबे को प्राकृतिक खेती में बदल दिया है। यह काम केवल उपज बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ा योगदान दे रहा है।
बिचौलियों को हटाकर बनाया अनोखा बाजार मॉडल
किसानों की आय बढ़ाने के लिए यशपाल ने एक कारगर बाजार मॉडल भी विकसित किया है। उन्होंने प्राकृतिक उत्पादों की रिटेल मार्केटिंग का एक प्रभावी तरीका ईजाद किया। इस मॉडल में बिचौलियों को हटाकर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाई जाती है। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलता है।
साथ ही, उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्यान्न सीधे प्राप्त हो जाता है। यह मॉडल आज देश के अनेक किसानों के लिए मार्गदर्शक बन गया है। यह साबित करता है कि अच्छी खेती के साथ-साथ सही बाजार की समझ भी जरूरी है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी योजनाएं
यशपाल खोला जैसे किसानों की सफलता देश में प्राकृतिक खेती के महत्व को रेखांकित करती है। यह कहानी तब और प्रासंगिक हो जाती है जब किसान कल्याण योजनाएं राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बनती हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) की लाभार्थी सूची गूगल पर सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले विषयों में शामिल रही।
इस योजना के तहत नौ करोड़ से अधिक किसानों के खातों में सीधे लाभ पहुंचाया जाता है। इसकी हर नई किस्त की जानकारी के लिए किसान ऑनलाइन स्टेटस चेक करते हैं। यह दिखाता है कि किसान नई तकनीक और सरकारी योजनाओं से कितने जुड़े हुए हैं। देश के PM Kisan beneficiary list की तलाश करने वाले लाखों किसानों के लिए यशपाल की कहानी एक नई प्रेरणा है।
शिक्षा और समर्पण से बनी मिसाल
यशपाल खोला ने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से दो साल का डिप्लोमा भी किया हुआ है। वह अरावली किसान क्लब के प्रधान भी हैं और किसान रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं। उनके पास शैक्षणिक योग्यता और व्यावहारिक अनुभव का दुर्लभ संयोग है।
वे प्राकृतिक तरीके से गेहूं, सब्जियां और फलों की पैदावार करते हैं। उनकी इस यात्रा में उनके परिवार का पूरा साथ रहा है। परिवार में पत्नी अनीता, बेटी फलक, बेटा आरव और मां सुशीला देवी हैं। राष्ट्रपति भवन जाने का यह निमंत्रण पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है।
देशभर के छह चुनिंदा किसानों में मिली जगह
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति भवन में देश के विभिन्न राज्यों से केवल छह चुनिंदा किसानों को आमंत्रित किया गया है। यशपाल खोला उनमें से एक हैं। इस दौरान वह अन्य प्रमुख किसानों के साथ विचारों का आदान-प्रदान भी करेंगे। 26 जनवरी को वह गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होंगे जहां राष्ट्रपति उन्हें सम्मानित करेंगी।
27 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में ‘एट होम’ पार्टी में हिस्सा लेंगे। तीन दिन के इस कार्यक्रम में दिल्ली के दर्शनीय स्थलों का भ्रमण भी शामिल है। 28 जनवरी को वह रेवाड़ी वापस लौट आएंगे। यह अनुभव निश्चित रूप से उन्हें और अधिक किसानों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेगा।
राष्ट्र निर्माण में किसानों की भूमिका को मिली नई पहचान
राष्ट्रपति द्वारा दिया जाने वाला यह सम्मान प्राकृतिक खेती आंदोलन को एक नई राष्ट्रीय पहचान देगा। जिला प्रशासन का मानना है कि यशपाल का काम राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त पहल है। उनके प्रयासों की सराहना समाज, सरकार और प्रशासन द्वारा लगातार की जाती रही है।
यह घटना साबित करती है कि एक साधारण किसान भी दृढ़ संकल्प और नेक उद्देश्य से देश के सर्वोच्च सदन तक अपनी पहचान बना सकता है। Republic Day का यह आयोजन देश की कृषि प्रधान पहचान को फिर से याद दिलाता है। यह सम्मान पूरे हरियाणा और कृषि जगत के लिए गौरव का विषय है।

