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क्यों है चंद्रमा और बृहस्पति के बीच दुश्मनी, चांद को क्यों माना जाता है सुहाग का प्रतीक?

RIGHT NEWS INDIA: चंद्रमा मन का कारक होता है। चंद्रमा मां से जुड़ा हुआ होता है। चंद्रमा का स्वभाव बेहद सॉफ्ट होता है। बृहस्पति सभी ग्रहों के गुरु हैं। बृहस्पति जी को ज्ञान का कारक माना जाता है।

चंद्रमा और बृहस्पति के बीच का संबंध अच्छा नहीं था। मान्यता के अनुसार चंद्रमा और बृहस्पति एक दूसरे के दुश्मन थे। इसलिए चंद्रमा और बृहस्पति की साथ में पूजा नहीं की जाती है। आइए जानते हैं उनकी दुश्मनी का क्या कारण है उसके इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या है। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए हमने जाने माने एस्ट्रोलॉजर नितिन मनचंदा से बात की है। उन्होंने चंद्रमा और बृहस्पति जी की दुश्मनी के बारे में विस्तार से बताया है। आइए जानते हैं।

चंद्रमा और बृहस्पति के बीच दुश्मनी

एस्ट्रोलॉजर नितिन मनचंदा के अनुसार एक बार चंद्रमा शिक्षा प्राप्त करने के लिए बृहस्पति जी के पास गए थे। जिसके बाद वह उनकी पत्नी तारा की सुंदरता पर मोहित हो गए थे। इसके बाद उन्हें उनसे प्यार हो गया। जिसके बाद चंद्रमा के साथ उनकी पत्नी चली गई। जिसके बाद चंद्रमा और तारा ने शादी कर ली। शादी के बाद दोनों का पुत्र बुध ग्रह हुआ। जिसके बाद बृहस्पति और चंद्रमा के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में चंद्रमा की हार हुई। इसके बाद चंद्रमा को अपनी गलती का एहसास हुआ। जिसके बाद उन्होंने बृहस्पति जी से माफी मांगी। कुछ समय बाद बृहस्पति जी ने उन्हें माफ कर दिया।

बुध का नामकरण कैसे हुआ

चंद्रमा और बृहस्पति के बढ़ते विवाद के बाद ब्रह्माजी के पूछने पर तारा ने उन्हें बताया कि बुध चंद्र देव के पुत्र हैं। जिसके बाद चंद्र देव और तारा के बेटे का नामकरण किया गया और उनका नाम बुध रखा। चंद्र देव के पुत्र होने की वजह से बुध को क्षत्रिय माना जाता है। वहीं बृहस्पति के पुत्र होने की वजह से उन्हें ब्राह्मण माना जाता है। (कुंडली में बुध की दशा)

बुध बृहस्पति को मानते हैं पिता

बुध तारा और चंद्रमा के पुत्र हैं लेकिन वह अपने बृहस्पति को अपना पिता मानते हैं। लेकिन बृहस्पति ने कभी भी बुध को बेटे के रूप में स्वीकार नहीं किया है।

चांद को क्यों माना जाता है सुहाग का प्रतीक?

महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत रखती हैं। इस व्रत में चांद की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि चंद्रमा को ब्रह्मा ने लंबी आयु का वरदान दिया था। साथ ही चंद्रमा प्रेम, सुंदरता के प्रतीक माने जाते हैं।

चंद्रमा की पूजा पाठ करने से घर में सौभाग्य और समृद्धि बनी रहती हैं। जो व्यक्ति चंद्र दर्शन के लिए दान करते हैं उन्हें इसका बेहद लाभ मिलता है। (चतुर्थी का चांद क्यों नहीं देखना चाहिए)

बृहस्पति की पूजा का महत्व

नवग्रहों में सबसे सर्वश्रेष्ठ बृहस्पति ग्रह है। बृहस्पति ग्रह की पूजा करने से विवाह की अड़चनें दूर हो जाती है। इसके अलावा वैवाहिक जीवन में सुख मिलता है। बृहस्पति ग्रह पूजा करने से मांगलिक कार्य होते हैं।

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