Business News: भारतीय रिजर्व बैंक ने सोना और चांदी के आयात पर सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बुलियन आयात के लिए एडवांस रेमिटेंस की सुविधा पर रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि अब आयातक पहले भुगतान नहीं कर सकेंगे। यह निर्णय एक अक्टूबर से प्रभावी होगा।
यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग रोकने और विदेशी भुगतान के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। सोना भारत के सबसे बड़े आयातित उत्पादों में शामिल है। कई मामलों में विदेश भेजी गई राशि के बदले सामान देश में नहीं पहुंचता था। इससे फंड्स के गलत इस्तेमाल का खतरा बना रहता था।
नए विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियम
आरबीआई नेनए फॉरेक्स मैनेजमेंट नियम जारी किए हैं। इनका उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना और एकरूपता लाना है। हालांकि बुलियन आयात पर एडवांस पेमेंट रोकने के कारण स्पष्ट नहीं बताए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह धन शोधन रोकने का उपाय है।
नुवामा के फॉरेक्स और कमोडिटी हेड साजल गुप्ता ने इस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एडवांस पेमेंट के बाद भी सोना न आने पर पैसा संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ सकता है। आरबीआई इसी रास्ते को बंद करना चाहता है। यह निर्णय वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाएगा।
आरबीआई ने इंपोर्ट एक्सपोर्ट में थर्ड पार्टी पेमेंट की अनुमति दी है। रिसीट की भी अनुमति दी गई है। अब एक ही विदेशी खरीदार या सप्लायर के बीच देनदारियों का समायोजन आसानी से किया जा सकेगा। इसके लिए बैंकों की अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।
एडवांस राशि वापसी को अनिवार्य बनाया
केंद्रीय बैंक नेएक महत्वपूर्ण नियम बनाया है। अगर तय अवधि में आयात नहीं होता है तो इंपोर्टर को एडवांस राशि वापस लानी होगी। यह राशि भारत वापस आनी चाहिए। ऐसा न करने पर भविष्य में सख्त शर्तें लागू होंगी।
इन शर्तों में अंतरराष्ट्रीय बैंक गारंटी या भारतीय बैंक की काउंटर गारंटी शामिल हो सकती है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और जोखिम कम करना है। बैंकों को भी इसकी निगरानी करनी होगी। नियमों के पालन की जिम्मेदारी बैंकों पर होगी।
सोना चांदी को छोड़कर अन्य वस्तुओं के आयात में बैंकों को अधिकार मिले हैं। बैंक अब एडवांस पेमेंट की सीमा तय कर सकेंगे। तय सीमा से अधिक भुगतान पर स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट अनिवार्य हो सकता है। बैंक गारंटी भी जरूरी हो सकती है।
कारोबारी हलकों में प्रतिक्रिया
आरबीआई केइस फैसले से बुलियन इंपोर्टर्स और कारोबारियों में हलचल है। उनका मानना है कि इससे कारोबार पर असर पड़ेगा। कुछ व्यापारियों ने चिंता जताई है कि इससे आयात प्रक्रिया धीमी हो सकती है। हालांकि बैंक का कहना है कि यह छोटे इंपोर्टर्स के लिए फायदेमंद होगा।
नए नियमों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। यह बदलाव व्यापार को और पारदर्शी बनाएगा। वित्तीय अनुशासन बढ़ाने में यह कदम मददगार साबित होगा। बुलियन कारोबार पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
भारत में कच्चा तेल और सोना सबसे बड़े आयातित उत्पाद हैं। इन पर नियंत्रण जरूरी माना जाता है। आयात के नाम पर विदेश भेजे गए फंड की निगरानी एक चुनौती रही है। नए नियम इस चुनौती से निपटने में मदद करेंगे।
यह फैसला वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। आरबीआई ने पहले भी ऐसे कदम उठाए हैं। यह उसी नीति का विस्तार है।
