देश के चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के चुनाव नतीजों को लेकर मीडिया का एक धड़ा नतीजों के कवरेज के बहिष्कार की बात कर रहा है। मामले पर एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने देश की सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि देश के लोगों ने जिन सरकारों पर भरोसा किया उन्होंने देश की जनता को बीच मझधार में छोड़ दिया।

रवीश कुमार ने लिखा, ‘चुनावी नतीजों को कवर न करें चैनल लेकिन इसके नाम पर नैतिकता की नौटंकी भी न करें। यह सवाल स्टंट का नहीं है। जब सैंकड़ों हज़ारों लोग ऑक्सीजन की कमी की वजह से तड़प कर मर गए तब यह सवाल केवल स्टंट का नहीं होना चाहिए। कुछ चैनलों ने फैसला किया है कि वे चुनावी नतीजों को कवर नहीं करेंगे।

हमें देखना चाहिए कि क्या ये चैनल जो चुनावी नतीजों को कवर नहीं करेंगे, कोविड की नाकामी को लेकर सरकार से सवाल करेंगे? चुनावी नतीजों को कवर न करने के जिस नैतिक बल का प्रदर्शन कर रहे हैं क्या वे उस नैतिक बल से उस सरकार को घेरेंगे जिसके झूठ को लोगों तक पहुंचाते रहे?’

गौरतलब है कि शनिवार को देश में कोरोना से एक दिन में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। जानलेवा वायरस ने 3,700 मरीजों को उनके परिजनों से छीन लिया। देश के कई छोटे राज्यों मसलन उत्तराखंड से भी 100 से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। कल कोरोना के 3.92 लाख नए मामले दर्ज किए गए।

देश के हालात पर रवीश कुमार ने लिखा, ‘अब सवाल आता है कि क्या चुनावी नतीजों को कवर करना चाहिए? मेरी राय में नहीं करना चाहिए। हमने जिन हुक्मरानों पर भरोसा किया उन्होंने सबको फंसा दिया। कितने परिवारों में कितने लोग खत्म हो गए। आपके हमारे प्रधानमंत्री ने संवेदना के दो शब्द नहीं कहे हैं। चुनाव आयोग भी दोषी है। मद्रास हाईकोर्ट ने ठीक कहा है। बंगाल जीतने के लिए आठ आठ चरणों में चुनाव की रणनीति बनाई गई। जो चुनाव एक या दो चरण में खत्म हो सकता था उसे लंबा खींचा गया। जो मीडिया घराने आज कवरेज न करने की नौटंकी कर रहे हैं उन लोगों ने चुनाव आयोग की इस भूमिको को लेकर कोई सवाल नहीं किया है। यह रिकार्ड है।’

मालूम हो कि कल दिल्ली में कोरोना से 412 मौतें दर्ज की गईं। राजधानी में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा 16,559 पहुंच गया है। कल दिल्ली में कोरोना के 25,219 नए मामले दर्ज किए गए।

चुनावी कवरेज पर रवीश कुमार ने लिखा, ‘इसलिए सभी को एक फैसला लेना चाहिए। चुनावी नतीजों को कवर नहीं करना चाहिए। लेकिन उसका मकसद साफ होना चाहिए। मकसद होना चाहिए कि हम यह बताना चाहते हैं कि लोगों की मौत के ज़िम्मेदार कारणों में हमारा चुनाव आयोग भी है। हमारी सरकार भी है। हमारे प्रधानमंत्री भी हैं। हमारी राज्य सरकारें भी हैं। मकसद बताए बगैर सिर्फ कवरेज न करने का फैसला कोई मायने नहीं रखता है। हम इस झांसे में नहीं आना चाहते कि सिर्फ ऐसा करने से ये गिद्ध चैनल पत्रकारिता की तरफ लौट आएंगे। उन्हें मालूम है कि उनके झूठ के कारण उनके अपने भी नहीं बच सके। उन्हें सच्चाई मालूम है लेकिन वो बता नहीं रहे हैं। ‘

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