हिमाचल भी अब जाति आधारित राजनीति का अड्डा बनता जा रहा है। यहाँ आए दिन एक जाति दूसरी जाति के खिलाफ संगठन बना कर आवाज बुलंद कर रही है। कई बाहर से आए संगठनों ने हिमाचल के लोगों को संविधान और कानून के प्रति भ्रमित कर मनमाने तरीके से लोगों को आवाज बुलंद करने के लिए भड़काना शुरू कर दिया है। सबसे बड़ी शर्म की बात यह है कि संविधान के आर्टिकल 13, 14 और 15 को दरकिनार करते हुए सरकार ऐसे संगठनों को चलाने की अनुमति दे रही है। जबकि ऐसे संगठनों पर संवैधानिक तौर पर पूर्ण पाबंदी है। ऐसा ताजा मामला हिमाचल की राजधानी में पिछले कई दिनों से सामने आ रहा है जहां कुछ लोग भारतीय संविधान, उच्चतम न्यायालय और संसद के द्वारा निर्मित कानूनों को सरेआम चुनौती दी जा रही है। इस मामले में सरकार, प्रशासन और पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है।

इस मामले में दलित समाज के हितैषी और चिंतक रवि कुमार दलित ने आज कहा कि दलित समाज के साथ हो रहे अत्याचारों को लेकर और जो लोग एट्रोसिटी एक्ट और आरक्षण का विरोध कर रहे है जो ना ही तर्कसंगत है ना ही न्याय संगत है और ना ही संविधानिक है क्योंकि दोनों ही कानून संविधान में अंकित है कल हम महामहिम राज्यपाल महोदय से जो लोग कानूनों का विरोध कर रहे हैं उनके खिलाफ संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्यवाही की मांग करेंगे मेरा दलित समाज के सभी लोगों से अनुरोध है कि कल जरूर अंबेडकर चौक पहुंचे कल बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती भी है और यही वक्त है कि हम अपनी बात संविधानिक कुर्सी पर बैठे महामहिम राज्यपाल के समक्ष रखें।

उन्होंने बताया कि यह निमंत्रण हमें नगर निगम शिमला की तरफ से भेजा गया है और हम चाहते हैं कि वहां पर हम सिर्फ और सिर्फ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी के चरणों मैं फूल अर्पण करने तक ही सीमित ना रहे हम अपनी बात और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित हो मेरा सभी दलित संगठनों से आहवान है कि कल अवश्य ही तय समय पर पहुंचे।

हमारी पुलिस अधीक्षक शिमला जिला उपायुक्त शिमला अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से हाथ जोड़कर विनती है कि जिस प्रकार हर बार हम मौके पर पहुंचकर मुख्य अतिथि से बात करना चाहते हैं अपनी मांग रखना चाहते हैं तो हमें वहां से खदेड़ने की कोशिश की जाती है बात तक नहीं करने दी जाती है विशेषकर शिमला शहरी अध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज जी से भी हाथ जोड़कर विनती है की इस पावन मौके पर हमें अपनी बात रखने का पूर्णतया मौका दिया जाए और कोई ऐसी स्थिति वहां पर पैदा ना की जाए जिससे हर बार की तरह हमें विरोध ना करना पड़े इसलिए कल हम माननीय महामहिम राज्यपाल महोदय के समक्ष अपनी बात को रखेंगे।
जय भीम जय भारत जय संविधान

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