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हिमाचल में 6700 परिवारों का राशन कार्ड संकट में, BPL सूची से नाम कटने पर गांवों में बवाल!

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भारी उथल-पुथल मची हुई है। सरकार ने हजारों परिवारों को बीपीएल (BPL) और अंत्योदय सूची से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। जसवां-परागपुर और देहरा क्षेत्र में कुल 6,700 से ज्यादा परिवारों पर यह गाज गिरी है। अब इन गरीब परिवारों को राशन कार्ड (Ration Card) के जरिए मिलने वाली सस्ती दाल-रोटी की चिंता सता रही है। प्रशासन के इस सख्त फैसले से पंचायतों में गुस्सा भड़क उठा है। लोग अब अपनी आजीविका और सम्मान को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।

देहरा में सिर्फ 195 परिवार ही बचे पात्र

सरकारी छंटनी के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। देहरा विधानसभा क्षेत्र में पहले 3946 परिवार बीपीएल और अंत्योदय सूची में शामिल थे। नई जांच के बाद अब केवल 195 परिवार ही इसके पात्र माने गए हैं। इसी तरह जसवां-परागपुर में 2959 परिवारों का नाम लिस्ट से हटा दिया गया है। राशन कार्ड से मिलने वाली मदद बंद होने के डर से गरीब परिवार दहशत में हैं। कई पंचायतों में तो 200 परिवारों में से मुश्किल से 4-5 परिवार ही नई सूची में जगह बना पाए हैं।

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अधिकारियों ने ऐसे तैयार की नई लिस्ट

ग्राम सभाओं में कोरम पूरा नहीं होने का हवाला देकर सरकार ने नियम बदल दिए थे। सूची को फाइनल करने का अधिकार एसडीएम, बीडीओ और इंस्पेक्टर की समिति को सौंप दिया गया। इस समिति ने पंचायत सचिव, पटवारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया गया। कागजी मानकों के चक्कर में कई जरूरतमंदों का राशन कार्ड छिनने की नौबत आ गई है।

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मजदूर और छोटे किसान भी हुए बाहर

पंचायत प्रतिनिधियों ने इस नई व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि सरकार की शर्तें इतनी जटिल हैं कि आम मजदूर भी उसमें फिट नहीं बैठ रहा। दिहाड़ीदार और छोटे किसान भी बीपीएल की कसौटी से बाहर हो गए हैं। जिन परिवारों के पास कमाई का कोई पक्का जरिया नहीं है, वे भी लिस्ट से गायब हैं। राशन कार्ड न होने से अब उन्हें मुफ्त इलाज और पेंशन जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पाएंगी। इस फैसले ने सामाजिक सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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