World News: कोलंबिया में एक बुजुर्ग महिला के पेट में तेज दर्द की शिकायत ने चिकित्सा विज्ञान का एक दुर्लभ राज खोल दिया। जांच में पता चला कि उनके पेट में ट्यूमर नहीं बल्कि चालीस साल पुराना एक कैल्सीफाइड भ्रूण मौजूद था। इस अवस्था को लिथोपेडियन या स्टोन बेबी कहा जाता है। दुनिया भर में अब तक ऐसे मामले तीन सौ से भी कम दर्ज हुए हैं।
साल 2013 की इस घटना ने डॉक्टरों को भी चौंका दिया। बोगोटा के एक अस्पताल में 82 वर्षीया महिला भर्ती हुईं। शुरुआती जांच में डॉक्टरों को पेट में गांठ की आशंका हुई। पर सीटी स्कैन और एक्स-रे के बाद सच्चाई सामने आई। पेट में मौजूद वस्तु कोई ट्यूमर नहीं थी।
वह एक पूरी तरह से कैल्सीफाइड भ्रूण था। यह लगभग चार पाउंड वजन का था और पत्थर जैसा कठोर बन चुका था। डॉक्टरों ने बताया कि यह भ्रूण करीब चालीस वर्ष पुराना था। महिला को इस बारे में पूरी तरह से अंजान थीं।
लिथोपेडियन क्या है?
यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसीका एक दुर्लभ परिणाम है। इसमें गर्भ गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगता है। ऐसे में भ्रूण आमतौर पर जीवित नहीं रह पाता। शरीर इसे बाहर भी नहीं निकाल पाता। फिर शरीर एक अनोखी प्रक्रिया शुरू करता है।
संक्रमण से बचाव के लिए शरीर भ्रूण के चारों ओर कैल्शियम की परत जमा देता है। यह प्रक्रिया कैल्सीफिकेशन कहलाती है। धीरे-धीरे भ्रूण पत्थर जैसा कठोर हो जाता है। यह दशकों तक शरीर में बिना लक्षण दिखाए रह सकता है।
दुनिया में बहुत कम देखा गया है ऐसा केस
एबीसीन्यूज और सीबीएस न्यूज जैसे प्रमुख स्रोतों के अनुसार यह मामला अत्यंत दुर्लभ है। पहला ज्ञात मामला सन 1582 में दर्ज किया गया था। तब से अब तक केवल लगभग तीन सौ मामले ही रिपोर्ट हुए हैं। अक्सर यह बुजुर्गावस्था में अन्य जांचों के दौरान खुलासा होता है।
कोलंबिया की इस महिला को पेट दर्द के अलावा कोई गंभीर समस्या नहीं थी। यही कारण है कि भ्रूण इतने लंबे समय तक अनजाने में शरीर में रह सका। इसने मेडिकल साइंस के लिए एक हैरान करने वाला तथ्य प्रस्तुत किया।
अन्य देशों में भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
साल 2014 मेंअल्जीरिया में एक 73 वर्षीय महिला का मामला सामने आया। उनके पेट से तीस साल पुराना स्टोन बेबी सर्जरी से निकाला गया। एक अन्य मामला 92 साल की एक महिला का था। उनके शरीर में पचास साल पुराना लिथोपेडियन पाया गया।
ये सभी घटनाएं मानव शरीर की अद्भुत सुरक्षात्मक प्रक्रिया को दर्शाती हैं। शरीर मृत भ्रूण को बाहरी खतरों से बचाने के लिए उसे कैल्शियम की चादर में सील कर देता है। इससे यह लंबे समय तक शरीर के लिए हानिरहित बना रहता है।
चिकित्सा जगत में इस तरह के मामले बेहद कम सामने आते हैं। हर नया केस डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के लिए ज्ञान का नया अध्याय जोड़ता है। यह मामला मेडिकल जर्नल्स में भी चर्चा का विषय बना। इसने एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के दीर्घकालिक प्रभावों पर प्रकाश डाला।
मानव शरीर की जटिलताएं अक्सर विज्ञान को नई चुनौतियां देती हैं। लिथोपेडियन जैसी स्थितियां इस बात का प्रमाण हैं। ये दर्शाती हैं कि शरीर कितने अनोखे तरीकों से खुद को संचालित और संरक्षित करता है। हर नया केस चिकित्सा इतिहास का हिस्सा बन जाता है।

