Gujarat News: गुजरात की एक अदालत ने न्याय की एक नई मिसाल पेश की है. राजकोट में 7 साल की मासूम के साथ हुई बर्बरता के मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने घटना के महज 44 दिनों के भीतर आरोपी को फांसी की सजा सुना दी है. यह मामला दिल्ली के निर्भया कांड जैसा ही भयानक था. दोषी ने मासूम के साथ अमानवीय क्रूरता की थी. विशेष पॉक्सो अदालत के इस फैसले की हर तरफ चर्चा हो रही है.
दिल दहला देने वाली थी वारदात
यह वीभत्स घटना 4 दिसंबर 2025 की है. राजकोट जिले के कानपार गांव में एक 7 साल की बच्ची बगीचे में खेल रही थी. तभी गांव का ही रहने वाला रामसिंह डुडवा उसे बहलाकर झाड़ियों में ले गया. वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. दरिंदगी यहीं नहीं रुकी. आरोपी ने लोहे की रॉड से बच्ची के शरीर को गंभीर चोटें पहुंचाईं. वह मासूम को तड़पता हुआ छोड़कर भाग गया था.
पुलिस ने 11 दिन में दाखिल की चार्जशीट
घटना की जानकारी मिलते ही राजकोट ग्रामीण पुलिस हरकत में आ गई. पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 8 दिसंबर 2025 को आरोपी रामसिंह को गिरफ्तार कर लिया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने दिन-रात एक कर दिया. जांच अधिकारियों ने सिर्फ 11 दिनों के अंदर पूरी जांच खत्म कर दी. पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी.
जज ने सुनाई मौत की सजा
विशेष पॉक्सो अदालत ने इस केस को ‘फास्ट ट्रैक’ पर चलाया. मामले की सुनवाई रोजाना की गई. 12 जनवरी 2026 को कोर्ट ने रामसिंह को दोषी करार दिया था. इसके बाद शनिवार, 17 जनवरी 2026 को न्यायाधीश वीए राणा ने अपना फैसला सुनाया. उन्होंने दोषी रामसिंह को फांसी की सजा मुकर्रर की. कोर्ट ने माना कि यह अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में आता है.
