Rajasthan News: राजस्थान में जल्द ही नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले जयपुर में बुर्कानशी महिलाओं ने कड़ा ऐतराज जताया है। दरअसल, चुनाव में पहचान साबित करने के लिए चेहरा खोलने का नियम है, लेकिन महिला कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं लगाई गई है। राजस्थान न्यूज में यह मुद्दा गर्माता जा रहा है। मुस्लिम महिलाओं ने राज्य निर्वाचन आयोग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह फैसला उनकी धार्मिक भावनाओं और गरिमा के खिलाफ है।
पहचान दिखाने को तैयार, लेकिन एक शर्त
मुस्लिम महिलाओं ने साफ कहा है कि वे निष्पक्ष चुनाव के पक्ष में हैं। वे अपनी पहचान साबित करने के लिए चेहरा खोलने को तैयार हैं। लेकिन उनकी मांग है कि जांच के लिए वहां महिला कर्मचारी मौजूद होनी चाहिए। राजस्थान न्यूज के मुताबिक, महिलाओं का कहना है कि आयोग ने एक तरफ महिला कर्मचारियों की ड्यूटी खत्म कर दी है। वहीं दूसरी तरफ महिलाओं से चेहरा खोलकर पहचान बताने को कहा है। उन्हें डर है कि यहां बिहार जैसा इतिहास दोहराने की तैयारी की जा रही है।
क्या महिलाओं को टारगेट किया जा रहा?
महिलाओं का आरोप है कि इस नियम की आड़ में मुस्लिम महिलाओं को टारगेट किया जा सकता है। उन्हें पोलिंग बूथ तक जाने से रोकने की कोशिश हो सकती है। उनका कहना है कि यह अकेले मुस्लिम महिलाओं की बात नहीं है। यह सभी महिलाओं का अपमान है। राजस्थान में बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम महिलाएं भी घूंघट में रहती हैं। राजस्थान न्यूज पर नजर रखने वालों के मुताबिक, यह मुद्दा चुनाव में बड़ा असर डाल सकता है।
मतदान केंद्र पर विवाद होने की आशंका
महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अगर मतदान के वक्त कोई पुरुष कर्मचारी चेहरा खोलने को कहेगा, तो विवाद होगा। इसका विरोध होना तय है। आरोप है कि वोट बैंक की राजनीति के चलते जानबूझकर यह विवाद पैदा किया जा रहा है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की गाइडलाइन अलग है। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग मनमाने तरीके से काम कर रहा है। राजस्थान न्यूज में आयोग के इस रवैये की आलोचना हो रही है।
संविधान और सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
मुस्लिम महिलाओं के मुताबिक किसी गैर पुरुष के सामने नकाब या हिजाब उतारना उनका सम्मान खत्म करने जैसा है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मांग की है कि राज्य निर्वाचन आयोग अपने फैसले पर फिर विचार करे। वहां महिला कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। टीचर साबिया परवीन और वकील सैयदा समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आवाज उठाई है। उनका कहना है कि चुनाव की पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन महिलाओं का सम्मान हर हाल में होना चाहिए। संविधान और मर्यादाओं से ऊपर कोई नहीं है।
