New Delhi News: संसद परिसर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आचरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। देश के 200 से अधिक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों, नौकरशाहों और वरिष्ठ वकीलों ने उनके व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई है। इन दिग्गजों ने राहुल गांधी से राष्ट्र से माफी मांगने की अपील की है। उन्होंने एक खुला पत्र जारी कर संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है।
संसदीय नियमों के उल्लंघन का आरोप
आम जनता के नाम जारी इस पत्र में 204 पूर्व अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए हैं। पत्र में कहा गया है कि संसद भवन की सीढ़ियों पर बैठकर चाय पीना और बिस्कुट खाना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। सेवानिवृत्त अधिकारियों के अनुसार, यह लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। इस पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने किया है। इसमें कहा गया है कि ऐसा आचरण अहंकार और विशेषाधिकार की मानसिकता को दर्शाता है।
लोकतंत्र के मंदिर की गरिमा पर जोर
पूर्व अधिकारियों ने अपने पत्र में संसद को ‘लोकतंत्र का मंदिर’ बताया है। उन्होंने कहा कि संसद की सीढ़ियां कोई राजनीतिक रंगमंच या तमाशा करने की जगह नहीं हैं। पत्र में उल्लेख है कि संसद के गलियारों और सीढ़ियों सहित पूरे परिसर की गरिमा सुरक्षित रहनी चाहिए। हस्ताक्षर करने वालों में 116 पूर्व सैन्य अधिकारी और 84 पूर्व नौकरशाह शामिल हैं। इनमें चार पूर्व राजदूत और चार वरिष्ठ अधिवक्ता भी अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने की चिंता
पूर्व नौकरशाहों के अनुसार, राहुल गांधी का बार-बार ऐसा व्यवहार सार्वजनिक विमर्श के स्तर को गिरा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन इस प्रक्रिया में लोकतंत्र की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी और उनके सहयोगियों के इस अशिष्ट आचरण पर गहरा दुख व्यक्त किया है।


