शिमला पहुंची पंजाब विधानसभा की समिति: 100 साल पुराने इस ऐतिहासिक सदन में छिपे हैं कई राज, जानें क्यों खास है ये दौरा

Himachal News: पंजाब विधानसभा की आश्वासन समिति मंगलवार को दो दिवसीय अध्ययन प्रवास के दौरान हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय पहुंची। समिति के सभापति सरदार देविन्द्राजीत सिंह लाडी दौस के नेतृत्व में आए इस प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान दोनों राज्यों के बीच ऐतिहासिक और विधायी संबंधों को लेकर गहरी चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने हिमाचली परंपरा के अनुसार टोपी और शॉल पहनाकर पंजाब से आए मेहमानों का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने याद दिलाया कि शिमला का यह सदन कभी पंजाब विधानसभा की बैठकों का गवाह भी रहा है।

राष्ट्रीय धरोहर काउंसिल चैम्बर का गौरवशाली इतिहास

भेंट के बाद कुलदीप सिंह पठानिया स्वयं पंजाब की समिति को सदन और काउंसिल चैम्बर दिखाने ले गए। उन्होंने बताया कि यह भवन एक राष्ट्रीय धरोहर है, जिसका निर्माण 1920 से 1925 के बीच मात्र 10 लाख रुपये में हुआ था। इसी सदन में 1925 में विट्ठल भाई पटेल केंद्रीय विधानसभा के पहले निर्वाचित अध्यक्ष बने थे। पठानिया ने रोचक जानकारी साझा करते हुए बताया कि ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ और ‘महिलाओं को मताधिकार’ देने जैसे ऐतिहासिक प्रस्ताव इसी चारदीवारी के भीतर पारित हुए थे। आज भी अध्यक्ष के आसन के रूप में 1925 में बर्मा सरकार द्वारा भेंट की गई सागौन की कुर्सी का उपयोग होता है।

ई-विधान प्रणाली में दुनिया का मार्गदर्शक बना हिमाचल

संसदीय कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि हिमाचल प्रदेश ई-विधान प्रणाली अपनाने वाला देश का पहला राज्य है। अब तक भारत के लगभग 22 राज्य इस आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए हिमाचल का अनुसरण कर चुके हैं। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मलेशिया संसद के अध्यक्ष भी इस प्रणाली को समझने शिमला आ चुके हैं। पंजाब की समिति ने भी हिमाचल के इस डिजिटल बदलाव की सराहना की और अपने राज्य में लागू राष्ट्रीय ई-विधान प्रणाली के अनुभवों को साझा किया।

मजबूत होंगे हिमाचल और पंजाब के विधायी संबंध

इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों की विधायी कार्यप्रणाली को समझना और आपसी सहयोग बढ़ाना है। सरदार देविन्द्राजीत सिंह लाडी ने पंजाब विधानसभा की आश्वासन समिति की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि ऐसे दौरों से संसदीय लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐतिहासिक रिश्तों की नींव पर खड़े हिमाचल और पंजाब भविष्य में भी विधायी कार्यों में एक-दूसरे का सहयोग करते रहेंगे। इस बैठक में विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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