पुलवामा शहीद की पत्नी बैठी धरने पर, आज तक नही मिला सहायता राशि

Read Time:8 Minute, 2 Second

Agra News: पुलवामा हमले में शहीद कौशल कुमार की पत्नी ममता रावत आगरा में पति की प्रतिमा के सामने गुरुवार को रात भर धरने पर बैठी रही। उसके बाद परिवार के साथ वहीं पर सो गई।आज भी वह धरने पर बैठी हुई हैं। ममता रावत का कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं होंगी, वो धरने से नहीं उठेंगी। शुक्रवार को योगी यूथ ब्रिगेड और अन्य संगठनों के पदाधिकारी शहीद की पत्नी का समर्थन करने उनके निवास पर पहुंचेंगे।

गुरुवार को एडीएम सिटी, सीओ सदर और उपजिलाधिकारी समेत कई अधिकारी शहीद की पत्नी से मिलने पहुंचे थे। ममता शिक्षा विभाग द्वारा परिवार की सहायता के लिए एकत्र की गई धनराशि परिवार को न देने पर सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार भी लगा चुकी हैं।

2 साल बाद भी नहीं मिली शहीद के परिवार के सहायता राशि
शिक्षकों और कर्मचारियों की इस मदद से 65 लाख 57 हजार की धनराशि एकत्र की गई थी। लेकिन दो साल बाद भी नहीं मिली।शहीद की पत्नी ने बीते 24 जून को सरकार पर कई आरोप लगाए थे। साथ ही जल्द मांग पूरी न होने पर आत्महत्या करने की बात भी कही थी। ममता रावत मांग पूरी न होने पर गुरुवार को परिवार के एक दर्जन लोगों के साथ पति की प्रतिमा के आगे धरने पर बैठ गई हैं।

शहीद की पत्नी धरने पर बैठी रही, डिप्टी सीएम को जानकारी नहीं

वहीं गुरुवार को डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा आगरा के दौरे पर थे। डिप्टी सीएम से जब शहीद की पत्नी के धरने पर बैठने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। शहीद की विरांगना से मिलने के सवाल पर उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि उनसे ोन पर बात कर लूंगा।

शहीद की पत्नी से मिलने की बजाय प्रीतिभोज को तवज्जो
आगरा दौरे पर पहुंचे डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने शहीद की पत्नी से मिलने की बजाय, उसकी समस्या सुनने की बजाय नवनिर्वाचित जिलापंचायत अध्यक्ष द्वारा आयोजित प्रीतिभोज में जाने को ज्यादा तवज्जो दी। बताया जा रहा है कि जहां डिप्टी के सीएम के जाने का कार्यक्रम है वहीं से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर शहीद की पत्नी अपने पूरे परिवार के साथ अनशन पर बैठी है।

शहीद की पत्नी बोलीं- मांग पूरी न होने तक धरने पर बैठी रहूंगी
शहीद कौशल कुमार रावत की पत्नी ममता रावत का कहना है कि पति की शहादत के बाद तमाम वायदे हुए और फिर आचार संहिता लग गई। तभी से हम प्रयास कर रहे हैं। एडीएम सिटी ने फोन पर पूछा था कि कब अनावरण करवाएंगी, लेकिन उसके बाद कोई जवाब नहीं आया। आज डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा आगरा में हैं। उनके पास तमाम काम हैं पर शहीद के घर आने का समय उनके पास नहीं है।

शिक्षकों का एक दिन का वेतन उन्हें न देना शहीद की शहादत का मजाक है, क्योंकि शिक्षकों के हिसाब से तो उन्होंने परिवार की मदद कर दी है पर मदद नहीं मिली है। वीडियो वायरल कर मांग करने के बाद भी किसी ने सुध नहीं ली तो अब मजबूरन धरने पर बैठी हूं। मांग पूरी न होने तक बैठी रहूंगी।

14 फरवरी 2019 को कौशल रावत पुलवामा हमले में हुए थे शहीद
14 फरवरी 2019 के दिन पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस हमले में भारतीय सेना के 40 से ज्यादा योद्धा शहीद हुए थे। उन्हीं शहीदों के परिवार में से एक परिवार आगरा के कहरई गांव निवासी कौशल कुमार रावत का भी है।

शहीद स्मारक बनवाने की घोषणा की गई थी
कौशल के परिवार के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा कई वादे किए गए, लेकिन आज तक एक भी वादा पूरा नहीं हुआ। शहीद का परिवार आज आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। राज्य सरकार की तरफ 25 लाख देने की घोषणा की गई थी। इतना ही नहीं उन्हें शहीद स्मारक बनाने के लिए जमीन देने की घोषणा भी की गई। साथ ही उनके गांव से लगती सड़क का नाम भी शहीद के नाम पर रखने की बात की गई थी।

शहीद की पत्नी की सरकार से ये है मांग
शहीद की पत्नी का आरोप है कि उनके पति की शहादत का मजाक उड़ाया जा रहा है। शिक्षकों का एक दिन का वेतन करीब 65 लाख रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा है। लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अभी तक पैसा नहीं मिला है। वो पैसा या तो शिक्षकों को वापस किया जाए या फिर उन्हें दिया जाए। उन्होंने पति की प्रतिमा के अनावरण किए जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल का नाम पति के नाम पर रखा जाए। गांव में द्वार बनवाया जाए।

अपनी ज़मीन पर खुद से बनवाया स्मारक

अपने पिता के नाम पर शहीद स्मारक बनाने के लिए उनका बेटा अपनी मां के साथ अधिकारियों के ऑफिस में कई महीनों तक चक्कर काटता रहा। लेकिन जमीन उपलब्ध नही कराई गई। बाद में शहीद के परिवार ने अपनी जमीन पर ही स्मारक बनवा लिया। शहीद की पत्नी ममता रावत का कहना है कि उनके पति कौशल रावत की प्रतिमा अनावरण के लिए अधिकारियों के आने की बाट जोह रही है। लेकिन हर बार टरकाया जा रहा है। कौशल के परिवार ने कभी सपने में भी ये नही सोचा होगा कि कौशल रावत की शहादत के बाद उनको ऐसा भी दिन देखना पड़ेगा।

कौशल के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं

कौशल के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। इतना ही नहीं अब सरकारी लापरवाही के चलते इस परिवार के सब्र का बांध भी टूट सा गया है। शहीद की पत्नी ममता की मानें तो योगी सरकार ने जरूर उस समय 25 लाख रुपये की मदद देने की पेशकश की थी और साथ ही शहीद स्मारक बनाने और सड़क का नाम शहीद कौशल कुमार रावत के नाम पर रखने की घोषणा की थी, लेकिन शहीद के परिवार की माने तो 25 लाख रुपय की मदद के बाद सरकार सब कुछ भूल गई।

error: Content is protected !!
Hi !
You can Send your news to us by WhatsApp
Send News!