प्रियंका गांधी की सक्रियता बढ़ी, यूपी इलेक्शन से जोड़कर देखी जा रही सभी गतिविधियां

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Narional News: अगले साल पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और सभी राजनीतिक दल अभी से तैयारी में जुट गए हैं। इन पांच राज्यों में से सबसे अधिक जोर राजनीतिक दलों का यूपी चुनाव पर है। देश के सबसे बड़े सियासी सूबे को ध्यान में रखते हुए कई दल अभी से ही खास रणनीति के तहत आगे बढ़ रहे हैं। हाल के दिनों में प्रियंका गांधी की सक्रियता बढ़ी है और कल पंजाब के मसले पर भी काफी ऐक्टिव नजर आईं। प्रियंका गांधी की इस सक्रियता को यूपी चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

ऐसी खबरों पर विराम लगाने की कोशिश
कई राज्यों में चुनावी हार और पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं का एक गुट, इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल कि पार्टी का अगला अध्यक्ष कौन होगा। अध्यक्ष का चुनाव जब होगा उसके पहले कांग्रेस आलाकमान ने इस बात को महसूस किया कि कार्यकर्ताओं के भीतर कहीं न कहीं निराशा आ रही है। यूपी में अगले साल चुनाव है और पार्टी के शीर्ष नेताओं की सक्रियता उतनी नहीं है जितनी दूसरे दलों की है। यह वो सवाल हैं कांग्रेस को लेकर जिस पर पार्टी विराम लगाना चाहती है।

पिछले कुछ समय में प्रियंका गांधी की पार्टी मसलों को लेकर सक्रियता काफी बढ़ी है। चाहें वो राजस्थान का मसला हो या पंजाब का। यूपी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के लिए भी इसमें कई संदेश छिपा है। कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा अब इसी महीने से मिशन यूपी पर निकलने वाली हैं।

जल्द यूपी का दौरा
प्रियंका गांधी अब पूरी तरह यूपी पर फोकस करने वाली हैं। इसी महीने वो यूपी के दस दिनों के दौरे पर रहेंगी। हालांकि पार्टी की ओर से इसकी घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद प्रियंका गांधी जुलाई के दूसरे हफ्ते में यूपी का दौरा करेंगी। इस दौरान वो लखनऊ, प्रयागराज, रायबरेली आदि जिलों का दौरा कर सकती हैं। पार्टी की राह यूपी में आसान नहीं है ऐसे वक्त में प्रियंका गांधी दल के दूसरे कई नेताओं से मुलाकात कर फीडबैक भी लेंगी।

दूसरे दलों के मुकाबले कि कांग्रेस का कोई नेता ऐक्टिव नजर नहीं आ रहा है इस सवाल पर विराम लगाने की उनकी पूरी कोशिश रहेगी। एक बार फिर इस बात की चर्चा जोरों पर है कि वो अब लखनऊ में कैंप करेंगी। पार्टी के लिए जमीन पर उतर कर रणनीति तैयार करने और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने का काम करेंगी।

विधायकों और सांसदों की संख्या के आधार पर नजर दौड़ाया जाए तो इस बात का आसानी से पता चल जाएगा कि यूपी में कांग्रेस की हालत क्या है। यूपी में पार्टी का ग्राफ पिछले कुछ सालों में काफी गिरा है। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी से लोकसभा चुनाव हार गए। सपा के साथ पिछला विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने का भी कोई फायदा नहीं हुआ। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से 114 सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए लेकिन जीत सिर्फ सात सीटों पर नसीब हुई। कई सीटों पर पार्टी उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा पाए। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी केवल यूपी के रायबरेली से चुनाव जीत पाईं।

प्रदेश में पार्टी संगठन में जो बदलाव हुए हैं वो प्रियंका गांधी के निर्देशानुसार ही हो रहे हैं। कांग्रेस की जमीनी हालत की जानकारी उन्हें नहीं है ऐसा नहीं है। ऐसे में इस बार का यूपी चुनाव प्रियंका गांधी के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण होगा। शायद इसको ही ध्यान में रखकर उन्होंने तैयारी शुरू भी कर दी है।

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