India News: अमेरिका और भारत अपने रिश्तों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीतियों से तनाव के बाद दोनों देश पटरी पर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। भारत में अमेरिका के नए नामित राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही भारत का दौरा कर सकते हैं। यह दौरा क्वाड देशों की बैठक में शामिल होने के लिए होगा।
राजदूत गोर ने स्पष्ट किया कि अभी इस यात्रा की सटीक तारीख तय नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि क्वाड बैठक को लेकर चर्चाएं पहले ही हो चुकी हैं। गोर के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप क्वाड समूह की निरंतरता और उसके सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। यह बयान द्विपक्षीय संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।
क्वाड शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि
पिछले साल यह खबर थी कि क्वाड देश भारत में इस साल शिखर सम्मेलन आयोजित करने पर विचार कर रहे थे। मूल योजना के अनुसार 2024 का क्वाड शिखर सम्मेलन भारत में होना था। लेकिन पिछले साल इसे अमेरिका स्थानांतरित कर दिया गया। इसका कारण तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन की विदेश यात्रा में असमर्थता और अमेरिकी चुनावी व्यस्तताएं बताई गईं।
इस साल का शिखर सम्मेलन पिछले साल की बैठक से काफी अलग होगा। अमेरिका और जापान दोनों देशों में नया नेतृत्व है। इससे क्वाड की रणनीति और एजेंडे पर नए सिरे से चर्चा होने की उम्मीद है। यह बदलाव क्षेत्रीय गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है।
ट्रंप की कूटनीतिक सक्रियता
सर्जियो गोर ने ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक पहलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस साल जापान की यात्रा पहले से कर चुके हैं। उन्होंने वहां के प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की है। जापान भी क्वाड का एक प्रमुख सदस्य देश है। दोनों नेताओं ने इस रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर जोर दिया है।
गोर ने भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का एक उदाहरण भी पेश किया। उन्होंने हाल ही में अलास्का में हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास का जिक्र किया। इस अभ्यास में दोनों देशों के लगभग 500 सैनिकों ने भाग लिया। यह सैन्य सहयोग द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती को दर्शाता है।
टैरिफ मतभेदों से आगे
राजदूत गोर ने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर कुछ मतभेद रहे हैं। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत-अमेरिका संबंध कहीं अधिक गहरे हैं। यह रिश्ता लंबे समय के भरोसे और shared values पर टिका है। उनका मानना है कि टैरिफ जैसे मुद्दे इस व्यापक साझेदारी को कमजोर नहीं कर सकते।
गोर के बयान में एक strategic संकेत भी छिपा था। उन्होंने इशारा दिया कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को इतना मजबूत बनाना चाहता है कि भारत चीन से स्वाभाविक दूरी बनाए। उनके अनुसार भारत का रिश्ता अमेरिका के साथ बीजिंग के मुकाबले कहीं ज्यादा गर्मजोशी भरा है।
यह दृष्टिकोण regional geopolitics में भारत की बढ़ती महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। क्वाड जैसे समूहों में भारत की सक्रिय भागीदारी strategic stability बनाए रखने में मददगार साबित हो रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग पूरे Indo-Pacific क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

