आम आदमी पार्टी अध्यक्ष अनूप केसरी बह उसकी मंडली तानाशाह हो चुकी है। हिमाचल में आम आदमी पार्टी को 6-7 पदाधिकारी ही तानाशाही तरीके से चला रहें हैं और अपनी बुनियादी काम व अन्याय के खिलाफ बात करने वाले पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता की आवाज को दबाना चाहते है। लेकिन, हम ऐसा नहीं होने देंगे यह कहना है कार्यकर्ता के डी राणा का। अध्यक्ष अनूप केसरी व शेषपाल सकलानी, युवा अध्यक्ष अनूप पटियाल की जनविरोधी नीतियों का विरोध करेगी और आम आदमी पार्टी के पुराने वरिष्ठ कार्यकर्तायों और प्रताड़ित पदाधिकारीयों के साथ अन्याय भी नहीं करने देगी।

के डी राणा का कहना है की वह आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय सयोंजक केजरीवाल की विचारधारा से प्रभावित हो कर पार्टी से एक कार्यकर्ता के रूप में जुड़े थे। के डी राणा ने कहा पार्टी के अध्यक्ष अनूप केसरी के नेतृत्व में, डिस्प्लीन समिति के सदस्य पूर्ण चंद और रमा गुलेरिया ने आनन फानन में मेरे राजनीतिक नाम से 6 सालों का निष्कासित पत्र बना डाला इतना ही नही साथ में अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता सहित 9 लोगों को एक साथ निष्कासित कर दिया। (के डी राणा, निक्का सिंह पटियाल, विशाल राणा, सचिन शर्मा, जगत निशा, टी पी पाण्डेय, जयबन्ती, अपूर्वा मिश्रा, नसीब सिंह कोटिया, कैप्टेन शिवम, तिलक राज) एक कार्यकर्ता जिसके पास ना तो कोई पद था और ना ही कोई पार्टी संबधित प्रमाण पत्र। जिससे की, अनूप केसरी, पूर्ण चंद व रमा गुलेरिया हास्य के पात्र बने हैं, क्योंकि एक कार्यकर्ता को निष्कासित करने का अधिकार किसी में नही है।

वहीं उन्होंने कहा कि शेषपाल सकलानी अपनी दबंगई दिखाता है और कार्यकर्तायों को जब चाहे तब फोन करके धमकाता है। उन्होंने कहा कि पुरे प्रदेश में यह 6-7 लोग ही पार्टी की विचारधारा को डुबो रहे हैं और पार्टी के दो फाड़ हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी का सारा संगठन दूसरी तरफ है। के डी राणा अनूप केसरी से जवाब मांगते हैं कि क्या आपने 9 लोगों की जोइनिंग एक साथ करवाई है? जबकि आप पार्टी के प्रदेश मौजूदा अध्यक्ष हैं, जैसे आपने 9 लोगों को एक साथ निष्कासित किया। इससे केजरीवाल की विचारधारा को काफ़ी झटका लगा है व इनके खिलाफ लोगों और कार्यकर्ता में काफी रोष में है। अन्य कार्यकर्ता से हुई बातचित पता लगा है कि अनूप केसरी, शेषपाल सकलानी और अनूप पटियाल जब तक पार्टी में तब तक आम आदमी पार्टी का हिमाचल प्रदेश में आना नामुमकिन है। जिसका परिणाम भी नगर निगम चुनावों में करोरी हार का देखने को मिला है। के डी राणा, पूर्व पदाधिकारी, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और लोगों की मांग है कि यह अपना इस्तीफा दें और माफ़ी मांगे। नही तो सारे कार्यकर्ता इनके खिलाफ आंदोलन करेंगे।

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