Uttar Pradesh News: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान एक विवाद सामने आया है। मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसी दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रशासन ने रोक दिया। उन्हें संगम नोज की ओर जाने से रोका गया। इस घटना के बाद पुलिस और उनके समर्थकों के बीच हल्की झड़प हुई।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों और श्रद्धालुओं के साथ अप्रिय व्यवहार दुखद है। उन्होंने सरकार से सभ्य बनने की सलाह दी।
शंकराचार्य ने लगाए गंभीर आरोप
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार को एक बयान जारी किया। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने उन्हें संगम जाने से रोक दिया। पुलिसकर्मियों ने उनकी पालकी को बीच रास्ते में रोक लिया। उनके अनुसार सीनियर पुलिस अधिकारियों ने उनके शिष्यों को धक्का दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की। इस वजह से उन्हें पवित्र स्नान किए बिना ही लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने स्नान न करने का निर्णय लिया। प्रशासन के व्यवहार ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
पत्रकारों से की बातचीत
शंकराचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अब स्थिति यह है कि उन्हें स्नान से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन जो चाहे कर सकता है। उन्होंने अपने लोगों से वापस लौटने के लिए कह दिया है।
उनके अनुसार प्रशासन इस प्रक्रिया को रोक रहा है। उनके आगे बढ़ने का कोई कारण नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि वे प्रशासन का समर्थन कर रहे हैं। उन्हें कोई समस्या नहीं है लेकिन प्रशासन को बताना चाहिए कि क्या गलत है।
मौनी अमावस्या का महत्व
मौनी अमावस्या माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान दिवस है। इस दिन साधु-संतों और भक्तों की भारी भीड़ संगम पहुंचती है। रविवार सुबह से ही घने कोहरे और ठंड के बावजूद लोग आए। तीर्थयात्रियों ने पवित्र स्नान करने की परंपरा निभाई।
प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई थीं। सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी की जा रही थी। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने का प्रयास किया गया था।
प्रशासन की चुनौती
संगम नोज पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। इस भीड़ को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। सुरक्षा और सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए। लेकिन शंकराचार्य के मामले में स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की सूचना मिली। इसने पूरे प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए। बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। यह घटना इस संतुलन को बनाए रखने की चुनौती दिखाती है।
