Maharashtra News: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव में मिली करारी हार पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने नतीजों को ‘धनबल और सत्ता’ की जीत बताया है। राज ठाकरे ने कहा कि यह मुकाबला भारी पैसे और शिवशक्ति के बीच था। हालांकि, पार्टी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली, लेकिन उनके हौसले अब भी बुलंद हैं। उन्होंने साफ किया कि मनसे न तो हताश है और न ही उसने हार मानी है।
हार नहीं मानेंगे, करेंगे मंथन
राज ठाकरे ने अपने बयान में कहा कि वे नतीजों का गहरा विश्लेषण करेंगे। पार्टी यह देखेगी कि आखिर कहां कमी रह गई और क्या गलत हुआ। उन्होंने कहा कि हम अपनी गलतियों से सीखेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। मनसे प्रमुख ने अपने जीते हुए पार्षदों को बधाई दी। उन्होंने भरोसा जताया कि उनके ये सिपाही सत्ताधारी ताकतों के सामने मजबूती से खड़े रहेंगे और जनता की आवाज उठाएंगे।
मराठी अस्मिता की लड़ाई जारी रहेगी
राज ठाकरे ने चेतावनी भरे लहजे में विरोधियों को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल मराठी लोगों को परेशान करने या उनका शोषण करने की कोशिश न करें। अगर ऐसा हुआ तो मनसे इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन हमारी सांस सिर्फ ‘मराठी’ है। पार्टी मराठी भाषा, लोगों और महाराष्ट्र के विकास के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।
फेल हुआ ‘ठाकरे ब्रदर्स’ का दांव
यह चुनाव ठाकरे परिवार के लिए बेहद खास था। करीब 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर आए थे। राजनीतिक पंडितों को उम्मीद थी कि दोनों भाइयों का साथ आना गेमचेंजर साबित होगा। लेकिन जनता ने इस गठबंधन को नकार दिया। राज्य स्तर पर यह जोड़ी कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई। भाजपा की आंधी में मनसे पूरे राज्य में सिर्फ 13 सीटों पर सिमट गई। वहीं, मुंबई (बीएमसी) में भी राज ठाकरे की पार्टी को केवल 6 सीटें ही मिलीं।
