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छलका दर्द..आखिर कला और शारीरिक शिक्षकों के पद क्यों नहीं भर रही जयराम सरकार

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में खाली पड़े कला व शारीरिक शिक्षकों के पदों को भरने की मांग एक बार फिर से शुरू हो गई है। बेरोजगार कला अध्यापक और शारीरिक अध्यापक की एक विडियो कॉन्फरेंस के माध्यम से मीटिंग हुई, जिसमें सभी जिलों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा समस्त बेरोजगार कला और शारीरिक अध्यापकों ने हिस्सा लिया। सभी जिला के अध्यक्षों ने अपने-अपने पक्ष रखें और आगे की रणनीति पर विचार किया और साथ में संघ ने हिमाचल सरकार को बधाई भी दी है कि पंचायत चुनाव में काफी अच्छी जीत मिली है। संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि पंचायत चुनाव खत्म हो चुके हैं, और अचार संहिता भी समाप्त हो चुकी है। बेरोजगार कला अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष मुकेश भरद्वाज और शारीरिक शिक्षक के प्रदेशाध्यक्ष शशि कांत ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को याद करवाया कि पंचायत चुनाव से पहले जैसे कला अध्यापक और शारीरिक अध्यापक के पदों को भरने पर पूर्ण तरीके से काम चल रहा था उसे जल्द से जल्द तेज किया जाये और हिमाचल में काफी समय से जिन सकूलों में कला और शारीरिक अध्यापकों के पद खाली चल रहे है उनको चरणबद्ध तरीके से भरा जाये। बेरोजग़ार कला अध्यापक के प्रदेशाध्यक्ष मुकेश भारद्वाज ने कहा है कि पूरे हिमाचल में कला अध्यापक के लगभग 1600 से अधिक और शारिरीक शिक्षक के 1800 से अधिक पद खाली चल रहे हैं।

लेकिन इनकी सं या अगले साल मार्च 2022 तक और बढ़ जायेगी, क्योंकि आरटीआई से पता चला है कि अगले साल तक काफी मात्रा में कला और शारीरिक अध्यापकों की रिटायरमेंट है। संघ के अध्यक्षों का कहना है कि पहले ही हिमाचल के सरकारी सकूलों में कला अध्यापक और शारीरिक अध्यापक ना होने से सकूलों में बच्चों की पढाई पर बहुत बुरा असर देखने को मिला था। मुकेश भरद्वाज ने सरकार और शिक्षा विभाग पर अरोप लगाते हुए कहा है कि सीएंडवी संघ भी कई बार मु यमंत्री और शिक्षा मंत्री व शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से इन पदों को भरने की मांग कर चुकें हैं, यहां तक की शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक से बैठक कर चुके हैं कि पुरे हिमाचल में कला और शारिरीक शिक्षकों के हजारों पद खाली चल रहे हैं, इन्हें जल्द से जल्द यथावत तरीके से भरा जाए, लेकिन बेरोजगार संघ ने कहा है कि कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। उधर शारीरिक शिक्षक के अध्यक्ष शशि कांत ने कहा है कि हम कई बार सरकार से मांग कर चुके हैं कि आरएंडपी रूल जो हमारे उपर लगाया जा रहा है, वो गलत तरीके से बिल्कुल निराधार है, क्योंकि ऐसा कहीं भी नहीं लिखा हैं कि कला और शारीरिक शिक्षक को जहां 100 बच्चों से कम सं या वाले सकूल है, वहां अध्यापक नहीं रखे जायेगें जो हाल ही में शिक्षा निदेशक ने भी पंचायत चुनाव से पहले यह स्पष्ट कर दिया था।

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