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Postmortem Report: मुर्दा शरीरों ने खोले खौफनाक राज! नसों में दौड़ रहा था ऐसा जहर, डॉक्टर भी रह गए दंग

Himachal News: हिमाचल प्रदेश से एक चौंकाने वाली ब्रेकिंग न्यूज सामने आई है। यहां मुर्दा घर में लाई गई लाशों ने अपनी मौत के बाद खौफनाक राज खोले हैं। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में हुए एक अध्ययन में बड़ा खुलासा हुआ है। पोस्टमार्टम के लिए लाए गए शवों में एचआईवी (HIV) और हेपेटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियां मिली हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मरने वाले लोग अपनी जिंदगी में इन गंभीर बीमारियों से अनजान थे। यह अध्ययन बताता है कि नशे की लत कैसे युवाओं को खोखला कर रही है।

युवाओं की नसों में मिला जानलेवा संक्रमण

लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने यह शोध किया है। यह ब्रेकिंग न्यूज मेडिकल जगत के लिए चिंता का विषय है। जांच के लिए कुल 228 ब्लड सैंपल लिए गए थे। इनमें से 79 फीसदी से ज्यादा शव पुरुषों के थे। रिपोर्ट में 0.87 फीसदी एचआईवी पॉजिटिव और 2.19 फीसदी हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव पाए गए। मरने वालों में अधिकतर युवा थे। इनमें से 85 फीसदी की उम्र महज 16 से 32 साल के बीच थी। यह आंकड़े डराने वाले हैं।

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नशा बना मौत और बीमारी का कारण

अध्ययन में सामने आया है कि संक्रमण के पीछे नशे का बड़ा हाथ है। पांच मामलों में मृतकों द्वारा नसों के जरिए नशा लेने (IV Drugs) का इतिहास मिला है। एक शव में तो एचआईवी और हेपेटाइटिस दोनों का संक्रमण एक साथ पाया गया। यह ब्रेकिंग न्यूज युवाओं में बढ़ते सिंथेटिक ड्रग्स के चलन की ओर इशारा करती है। नशे की यह लत न केवल व्यक्ति की जान ले रही है, बल्कि मौत के बाद भी दूसरों के लिए खतरा बन रही है।

डॉक्टरों और स्टाफ की जान को खतरा

यह रिसर्च ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ लीगल मेडिसिन’ में छपी है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौत के बाद भी एचआईवी और हेपेटाइटिस के वायरस शरीर में जिंदा रहते हैं। पोस्टमार्टम करते समय स्टाफ को सुई चुभने या औजार से कटने का डर रहता है। ऐसे में यह संक्रमण डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों में फैल सकता है। अस्पताल से जुड़ी यह ब्रेकिंग न्यूज स्टाफ की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है। यहां संक्रमण की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा मिली है।

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सुरक्षा के लिए कड़े नियम जरूरी

डॉ. अभिषेक शर्मा और उनकी टीम ने इस खतरे से निपटने के उपाय बताए हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि पोस्टमार्टम से पहले शवों की स्क्रीनिंग अनिवार्य होनी चाहिए। साथ ही ऑटोप्सी स्टाफ का हेपेटाइटिस टीकाकरण भी बहुत जरूरी है। यह अध्ययन पूरे हेल्थ सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। इस ब्रेकिंग न्यूज के बाद उम्मीद है कि अब शवों की जांच को लेकर कड़े प्रोटोकॉल बनाए जाएंगे ताकि मेडिकल स्टाफ सुरक्षित रह सके।

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