Uttar Pradesh News: मेरठ में दलित महिला की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। पार्टी ने सोमवार को आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के संरक्षण में जाति और धर्म के आधार पर नफरत फैलाई जा रही है। कांग्रेस ने सीधे तौर पर सीएम योगी की ‘बुलडोजर नीति’ पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों की जाति देखकर ही बुलडोजर चलाया जाता है।
मां की हत्या और बेटी का अपहरण
पुलिस के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना मेरठ के सरधना क्षेत्र के एक गांव की है। गुरुवार तड़के एक 22 वर्षीय युवक ने दलित महिला की बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी ने महिला की 20 वर्षीय बेटी का अपहरण भी कर लिया था। शनिवार को पुलिस ने सहारनपुर से युवती को बरामद कर लिया। साथ ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात है।
दलितों पर अत्याचार पर क्यों चुप है बुलडोजर?
कांग्रेस की अनुसूचित जाति इकाई के प्रमुख राजेंद्र पाल गौतम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दलितों और पिछड़ों को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रहे हैं। गौतम ने आरोप लगाया कि योगी का बुलडोजर अक्सर जाति और धर्म देखकर चलता है। जब राज्य में किसी दलित पर अत्याचार होता है, तो यह बुलडोजर हिलता तक नहीं है।
पीड़ित परिवार से मिलने से रोका गया
राजेंद्र पाल गौतम ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि पीड़िता अपनी मां के साथ जंगल की ओर जा रही थी। तभी बदमाशों ने बेटी को अगवा करने की कोशिश की। मां ने जब बेटी को बचाने का प्रयास किया, तो उसकी हत्या कर दी गई। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जब वे उत्तर प्रदेश में पीड़ित परिवार से मिलने गए, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस अपराध रोकने में तत्परता दिखाती, तो यह नौबत नहीं आती।
भाजपा शासित राज्यों में अपराध का ग्राफ बढ़ा
कांग्रेस ने आंकड़ों के जरिए भी सरकार को घेरा है। पार्टी का दावा है कि उत्तर प्रदेश समेत देश के पांच भाजपा शासित राज्यों में दलित उत्पीड़न की 76 फीसदी घटनाएं हुई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अकेले यूपी में ही 26 फीसदी मामले सामने आए हैं। गौतम ने कहा कि 2022 के बाद से सरकार ने दलित उत्पीड़न के आंकड़े सार्वजनिक करना बंद कर दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब न्याय मांगने के लिए भी 10 दिन पहले नोटिस देना होगा?
