मंडी के सुंदरनगर स्थित सीआरसी में पिछले कई सालों से चल रहे जातीय आधारित शोषण, यौन उत्पीड़न और शत्रुता पूर्ण काम का माहौल बनाने के आधार पर दर्ज हुए मुकदमे के बाबजूद अभी तक आरोपियों के खिलाफ निदेशालय देहरादून की ओर से कोई भी प्रशासनिक व विभागीय कार्यवाही अमल में नही लाई गई है तथा पुलिस में दर्ज मुकदमा दर्ज होने बाबजूद भी कोई गिरफ्तारी नही हुई है। प्रशासनिक आधार पर कम से कम ऐसे अभियुक्तों जोकि महत्वपूर्ण प्रभावशाली पदों पर कार्यरत है का तबादला कानून, सेवा व चालचलन के नियमों के आधार पर अति आवश्यक है। अभी तक हुई प्रशासनिक व पुलिस कार्यवाही से यही प्रतीत होता है कि प्रभावशाली अभियुक्त लोग कानून पर बहुत भारी पड़ रहे है। अब देखना यह है कि कानून इन प्रभावशाली अभियुक्तों पर अपनी कानूनी नकेल कब कसेगा।

खबर लिखने तक जो जानकारी सामने आई है वह यह है कि आज निदेशालय देहरादून से सीआरआई सुंदरनगर में अभियुक्तों पर लगे हुए आरोपों की जांच करने एक टीम आई है। लेकिन अभी तक हुई सभी जांच संदेह के घेरे में ही है। ना तो पुलिस ने कोई कार्यवाही की है, ना प्रशासन की ओर से आरोपियों को संस्थान से बाहर किया गया है, जबकि मामला संस्थागत अपराध का है।

जानकारी के मुताबिक इस मुकदमे में एक महिला को संस्थान के एचओडी मनजीत सैनी और एओ संदीप त्रिपाठी ने जातीय आधार पर एक महिला कर्मी को शोषण और यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया है। जानकारी के मुताबिक महिला ने 2016 में सीआरसी सुंदरनगर में नौकरी जॉइन की थी। उस दौरान महिला में अपना जाति प्रमाण पत्र भी दिया था। महिला के जाति प्रमाण पत्र दिए जाने के बाद से उपरोक्त दोनों अधिकारी महिला को आए दिन किसी ना किसी बात को लेकर प्रताड़ित करते रहते थे।

महिला के मुताबिक एचओडी मनजीत सैनी किसी ना किसी बहाने आफिस में बुलाता था तथा अश्लील हरकतें करता था। जिससे आहत और महबूर होकर महिला ने अपनी सुरक्षा के लिए नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। क्योंकि उपरोक्त आरोपी महिला का उनकी शारीरिक बनावट पर भी सरेआम उपहास बनाते थे और यौन उत्पीड़न का प्रयास करते थे।

महिला ने इस बारे पुलिस में अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। लेकिन आज 24 दिन बीत जाने पर भी पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार नही किया है। जोकि कानून और वर्तमान सरकार के नारे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का सरेआम उपहास है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए थी। लेकिन पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी माखौल में लिया। इस केस में सीआरसी भी कोई खास दिलचस्पी नही दिखा रहा जिसके चलते अभी तक किसी भी आरोपी को ना तो निलंबित किया गया है और ना ही संस्थान से हटाया गया है। जोकि एक बेहद गंभीर विषय है। जबकि कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच के लिए आरोपियों को सीआरसी सुंदरनगर से हटाया जाना बेहद जरूरी था।

जानकारी मिली है कि पुलिस ने महिला के 164 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत बयान न्यायालय में दर्ज करवा दिया है। लेकिन फिर भी पुलिस प्रभावशाली आरोपियों को गिरफ्तार करने से कतरा रही है।

By RIGHT NEWS INDIA

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