मुख्यमंत्री आवास के सामने मुख्यमंत्री, प्रशासन और पुलिस को दी गई धमकी, पुलिस कार्यवाही करने में नाकाम

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हिमाचल एक बेहद शांत और भोले भाले लोगों का घर था, हर ओर भाईचारा और प्रेम प्यार से लोग रहते थे। जब कोई मुशीबत में होता था तो हर कोई एक दूसरे की मदद करने के लिए आगे रहते थे। लेकिन क्या आज हिमाचल वैसा रह गया है जैसा हम आज से तीन चार साल पहले सोचते या समझते थे। आज परिस्थितियां इतनी अच्छी नहीं है जितनी तीन या चार साल पहले हुआ करती थी। हिमाचल में भाईचारा और मेलजोल की भावना लगभग खत्म हो चुकी है। हर ओर जातिवाद चरम पर दिख रहा है। मुठ्ठी भर लोग आम जनता को जाति आधारित मुद्दों पर भड़का कर प्रदेश में आग लगा रहे है। यह लोग इतने निरकुंश हो गए है कि सरकार, प्रशासन और पुलिस को भी चुनौती देने में पीछे नही हटते।

पुलिस प्रशासन को सरेआम धमकियां देते रुमित सिंह ठाकुर

इसका ताजा उदाहरण आज शिमला में प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिला। देव भूमि क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष रुमित सिंह ठाकुर सरेआम पुलिस और प्रशासन को धमकाते हुए दिखे। उनका एक वीडियो जारी हुआ हुआ है। जिसमें उन्होंने कहा कि प्रदेश में 45 लाख क्षत्रिय है और 60 लाख जनरल की कुल जनसंख्या है। वह सरेआम पुलिस को धमकाते नजर आए कि हिम्मत है तो हमें उठा कर दिखाओ। महज 40 से 50 लोगों की यह भीड़ सरकार प्रशासन और पुलिस पर भारी पड़ती नजर आई। हिमाचल प्रदेश पुलिस जोकि हर आदमी को जरा की बात पर थाने पहुंचा देती है। वह बगले झांकती नजर आई। मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश पर सरेआम धमकी भरे सुरों में टिप्पणियां की गई। लेकिन मजाल हो कि प्रशासन और पुलिस ने कोई एक्शन लिया हो।

वीडियो में सरेआम रुमित सिंह ठाकुर ने कहा गया कि प्रदेश में 45 लाख क्षत्रिय है, और 60 लाख जनरल के लोगों की जनसंख्या है।लेकिन तथ्य देखे जाए तो 2012 की जनगणना के अनुसार हिमाचल में 17 लाख से ज्यादा अनुसूचित जाति के लोग है और चार लाख से ज्यादा अनुसूचित जनजाति के लोग है। अर्थात हिमाचल में अकेले एससी और एसटी के लोग 21 लाख से ज्यादा है और ओबीसी और दूसरे मुस्लिम, सिख, ईसाई और अन्य धर्मों के लोग भी है।

झूठे आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में भय का माहौल खड़ा करना, पुलिस और प्रशासन को धमकाना और मुख्यमंत्री को चुनौती देना अपने आप में एक बहुत बड़ा अपराध है। हिमाचल प्रदेश पुलिस का ऐसे अपराध को चुपचाप देखना और समाज में भय का माहौल बनते देखना संविधान और कानून का खुला उल्लंघन है। अब देखना यह होगा कि हिमाचल प्रदेश सरकार, हिमाचल पुलिस और प्रशासन ऐसे निरकुंश लोगों के खिलाफ क्या कार्यवाही करती है।

हम विश्लेषण करें तो पाएंगे कि यह स्थिति बाहरी राज्यों से जातिवादी संगठनों के हिमाचल में प्रवेश के उपरांत बनी है। आए दिन यहां किसी ना किसी जाति विशेष के लोग अकारण दूसरी जाति के लोगों को टारगेट करना शुरू कर देते हैं। जिससे हिमाचल की परिस्थितियां दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है, जहां सरकार, प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि प्रदेश में एकता अखंडता और भाईचारे की भावना बनाए रखें। वही जाति आधारित मुद्दों पर सरकार का चुप रहना सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा सवाल है।

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