National News: जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा शुरू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने एक साथ पतंग की डोर पकड़ी और पतंग उड़ाई।
यह दृश्य दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक बन गया। मर्ज ने अपनी यात्रा की शुरुआत साबरमती आश्रम से की। वहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दोनों नेता पतंग महोत्सव स्थल पर पहुंचे।
मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव अहमदाबाद की सांस्कृतिक पहचान है। पीएम मोदी और चांसलर मर्ज ने एक खुली गाड़ी में सवार होकर रिवरफ्रंट का चक्कर लगाया। इस दौरान उन्होंने भारत और जर्मनी के झंडे वाली पतंगें एक साथ उड़ाईं।
यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हुए हैं। साथ ही रणनीतिक साझेदारी को 25 साल हो गए हैं। इस ऐतिहासिक मौके पर यह दौरा और भी खास हो गया है।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अनूठा प्रदर्शन
पतंगबाजी के माध्यम से दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक समझ बढ़ाने का संदेश दिया। यह कूटनीति का एक रचनात्मक और अनौपचारिक पहलू था। अहमदाबाद का पतंग महोत्सव 1989 से आयोजित हो रहा है। अब यह एक वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते इस उत्सव को बढ़ावा दिया था। आज दुनिया के कई देश इसमें भाग लेते हैं। चांसलर मर्ज का इस कार्यक्रम में शामिल होना एक विशेष पहल थी। इससे भारतीय संस्कृति की झलक जर्मन नेता को मिली।
दोनों नेताओं ने हनुमान जी की तस्वीर वाली एक पतंग भी उड़ाई। यह क्षण भारत की धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। पूरा कार्यक्रम सौहार्द और उल्लास के माहौल में संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों ने भी इस घटना को उत्साह के साथ देखा।
द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का प्रयास
चांसलर मर्ज की यह यात्रा मुख्य रूप से आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है। दोनों देश व्यापार, प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाना चाहते हैं। जर्मनी भारत का यूरोप में एक प्रमुख व्यापारिक साथी है।
मर्ज 12 जनवरी को अहमदाबाद पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उनका स्वागत किया। यात्रा का दूसरा दिन औपचारिक वार्ता के लिए समर्पित रहा। दोनों नेता गांधीनगर में महात्मा मंदिर में मिले।
इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के नए रास्ते तलाशे गए। साथ ही वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग की संभावनाएं भी देखी गईं। दोनों पक्षों ने शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
यात्रा कार्यक्रम और आगामी योजनाएं
13 जनवरी को चांसलर मर्ज ने बेंगलुरु का दौरा किया। उन्होंने वहां बॉश कंपनी और सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग का दौरा किया। यह कदम प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग को रेखांकित करता है। इसके बाद वह जर्मनी के लिए रवाना हो गए।
इससे पहले दोनों नेता जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा में मिल चुके थे। वहां हुई चर्चा ने इस आधिकारिक यात्रा की नींव रखी। भारत सरकार ने इस दौरे को अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया है। यह द्विपक्षीय संबंधों में नए अध्याय का सूचक है।
जर्मन उद्योग भारत में निवेश बढ़ाने के प्रति रुचि रखते हैं। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था एक आकर्षक गंतव्य है। दोनों देश जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर भी मिलकर काम करना चाहते हैं। यह साझेदारी वैश्विक भू-राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान महत्व
भारत और जर्मनी के संबंधों का इतिहास गहरा और बहुआयामी रहा है। शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में लंबे समय से आदान-प्रदान होता रहा है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में यह साझेदारी और अधिक प्रासंगिक हो गई है।
चांसलर मर्ज की यात्रा इसी साझेदारी को नई दिशा देने का प्रयास है। दोनों देश लोकतंत्र और मुक्त व्यापार के सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं। इन साझा मूल्यों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत आधार प्रदान किया है। भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्र भी तलाशे जाएंगे।
इस दौरे ने जनसंपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी ध्यान केंद्रित किया। नेताओं की पतंग उड़ाने की तस्वीरें दुनिया भर में सुर्खियां बनीं। इससे दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के जुड़ाव को बल मिलेगा। यह कूटनीति का एक सफल और प्रभावी पहलू साबित हुआ।

