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पीएम मोदी: फांसी देने के बजाय सीधे गोली मारी जाए, पीएम ने मन की बात में भगत सिंह को किया याद

India News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 126वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अमर शहीद भगत सिंह के अदम्य साहस को याद किया और देश के युवाओं के लिए उन्हें प्रेरणा का स्रोत बताया। साथ ही, पीएम मोदी ने आगामी त्योहारों के मौके पर स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की शक्तिशाली अपील भी की।

पीएम मोदी ने क्रांतिकारी भगत सिंह के जीवन से जुड़े एक प्रेरक प्रसंग को साझा किया। उन्होंने बताया कि फांसी से पहले भगत सिंह ने अंग्रेजों को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपने और अपने साथियों के साथ युद्धबंदियों जैसा व्यवहार करने की मांग की थी। उनका आग्रह था कि उन्हें फांसी देने के बजाय सीधे गोली मारी जाए।

यह घटना भगत सिंह की निडरता और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भगत सिंह का यह साहस हर भारतीय के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह न केवल एक साहसी क्रांतिकारी थे, बल्कि वे आम लोगों की पीड़ा के प्रति भी अत्यंत संवेदनशील थे।

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स्वदेशी उत्पादों को दीजिए प्राथमिकता

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आगामी त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे इस बार के त्योहारों को केवल स्वदेशी चीजों से ही मनाएं। उनका कहना था कि ऐसा करने से उत्सव की रौनक कई गुना बढ़ जाएगी।

उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को और मजबूती से दोहराया। पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि वे यह दृढ़ संकल्प लें कि हमेशा देश में निर्मित उत्पादों को ही खरीदेंगे। देश के लोगों द्वारा बनाए गए सामान को ही अपने घर ले जाएंगे।

खादी को बढ़ावा देने की अपील

प्रधानमंत्री ने खादी के बढ़ते प्रभाव पर भी प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में खादी के प्रति लोगों का आकर्षण काफी बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में खादी उत्पादों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह एक सकारात्मक बदलाव है।

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उन्होंने देश के नागरिकों से एक विशेष अनुरोध किया। पीएम मोदी ने कहा कि दो अक्टूबर को हर व्यक्ति को कोई न कोई खादी उत्पाद अवश्य खरीदना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें स्वदेशी उत्पादों पर गर्व महसूस करना चाहिए और इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।

यह राष्ट्रहित में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इससे छोटे उद्योगों और कारीगरों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन देशभक्ति और आत्मनिर्भरता के संदेश से भरपूर था। उन्होंने इतिहास के महानायकों से प्रेरणा लेकर वर्तमान में सार्थक बदलाव लाने की बात कही। यह देश को नई दिशा देने वाला एक प्रयास है।

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