रविवार, जनवरी 4, 2026
3.3 C
London

पीएम मोदी: वेनेजुएला का उदाहरण देकर ओवैसी ने पूछा- 26/11 के आतंकी पाकिस्तान से क्यों नहीं ला सकते?

Maharashtra News: महाराष्ट्र में होने वाले निकाय चुनावों के प्रचार में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि अमेरिका वेनेजुएला में फौज भेज सकता है तो भारत पाकिस्तान से 26/11 के आतंकियों को क्यों नहीं ला सकता। उन्होंने पीएम मोदी के ’56 इंच का सीना’ वाले बयान का जिक्र करते हुए यह चुनौती दी।

ओवैसी ने एक चुनावी रैली में वेनेजुएला की घटना का हवाला देते हुए कहा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वहां की सेना भेजकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके देश से उठा लिया। इसके बाद उन्होंने भारत की केंद्र सरकार को ललकारा। उनका सवाल था कि अगर अमेरिका यह कर सकता है तो भारत क्यों नहीं।

उन्होंने सीधे पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को संबोधित किया। ओवैसी ने कहा कि जब ट्रंप वेनेजुएला में फौज भेज सकता है और सऊदी अरब यमन में बमबारी कर सकता है, तो भारत सरकार क्या कर रही है। उन्होंने मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं को पाकिस्तान से वापस लाने की मांग की।

ओवैसी ने विशेष रूप से जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों का नाम लिया। उन्होंने कहा कि अगर पीएम मोदी के पास सचमुच 56 इंच का सीना है तो उन्हें यह काम करके दिखाना चाहिए। उन्होंने ट्रंप के कृत्य को एक उदाहरण के तौर पर पेश किया।

ओवैसी का चुनावी दांव

यह बयान महाराष्ट्र में15 जनवरी को होने वाले महानगरपालिका और नगरपालिका चुनावों से पहले आया है। ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इस तरह के विवादास्पद बयानों से चुनावी बहस को एक नया मोड़ मिलता है। यह रणनीति मतदाताओं का ध्यान खींचने के लिए भी हो सकती है।

यह भी पढ़ें:  हाई कोर्ट: पिता की संपत्ति पर बेटे का अधिकार नहीं! अदालत ने दिया घर खाली करने का आदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दे को स्थानीय चुनाव प्रचार से जोड़ने की कोशिश है। ऐसे सवाल अक्सर विपक्षी दल सत्तारूढ़ दल से पूछते रहे हैं। हालांकि, वेनेजुएला की घटना के साथ तुलना करना एक नया कोण है।

वेनेजुएला में क्या हुआ?

शनिवार कोवेनेजुएला की राजधानी काराकस में कई विस्फोटों की आवाजें सुनाई दी थीं। स्थानीय मीडिया ने नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमले की खबरें दी थीं। मादुरो सरकार ने इन घटनाओं के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया था। सरकार ने इसे साम्राज्यवादी हमला करार दिया था।

इसके बाद मादुरो सरकार ने अपने समर्थकों से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया था। कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बना लिया। उन्हें अमेरिका ले जाया गया। डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि की।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तब तक वेनेजुएला का प्रशासन संभालेगा जब तक वहां सुरक्षित सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता। यह घटना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ी घटना मानी जा रही है। कई देशों ने इस कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर सवाल

ओवैसीके बयान ने भारत और पाकिस्तान के बीच जटिल संबंधों पर पुराने सवाल फिर से उठा दिए हैं। 2008 के मुंबई हमलों के मुख्य आरोपी भारत द्वारा पाकिस्तान में बताए जाते रहे हैं। भारत लगातार इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है। इस मामले में कई बार कूटनीतिक तनाव भी बढ़ा है।

यह भी पढ़ें:  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट: नीट पीजी काउंसलिंग रोकी, 50% से ज्यादा आरक्षण को बताया असंवैधानिक, जानें पूरा मामला

भारत सरकार ने कई मौकों पर पाकिस्तान से इन आतंकियों को सौंपने की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत ने इस मुद्दे को उठाया है। हालांकि, पाकिस्तान हमेशा इनकार करता रहा है या कानूनी प्रक्रिया का हवाला देता रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

अभीतक भारत सरकार या भाजपा की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे चुनावी भाषण मान रहे हैं तो कुछ ने गंभीर सवाल उठाया है।

राजनीतिक दल अक्सर चुनाव के समय ऐसे मुद्दे उठाते हैं जो राष्ट्रीय भावनाओं से जुड़े हों। सुरक्षा और आतंकवाद ऐसे ही संवेदनशील मुद्दे हैं। यह बयान चुनाव प्रचार के दौरान बहस को एक नई दिशा दे सकता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता

विशेषज्ञोंका मानना है कि वेनेजुएला की घटना और भारत-पाकिस्तान के मामले में सीधी तुलना उचित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानून में किसी देश की संप्रभुता का सिद्धांत मूलभूत है। एक देश दूसरे देश में बिना अनुमति के सैन्य कार्रवाई नहीं कर सकता।

भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। पाकिस्तान में आतंकियों के मामले में भारत ने कूटनीतिक और कानूनी रास्ते चुने हैं। सरकार ने कई बार इस दिशा में ठोस कदम उठाने का दावा किया है।

महाराष्ट्र के आगामी चुनावों में यह बयान कितना प्रभाव डालता है, यह देखना दिलचस्प होगा। चुनावी रैलियों में अक्सर राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस होती है। ओवैसी का यह बयान उसी कड़ी का हिस्सा प्रतीत होता है।

Hot this week

Related News

Popular Categories