New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन कर उनका जन्मदिन की बधाई दी। दोनों नेताओं ने भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। पीएम मोदी ने पुतिन को इसी साल दिसंबर में भारत आमंत्रित किया। यह आमंत्रण 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए है।
इस फोन वार्ता में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। उन्होंने व्यापार, रक्षा और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। पीएम मोदी ने पुतिन के स्वास्थ्य और भविष्य के प्रयासों में सफलता की कामना की। दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर जोर दिया गया।
दिसंबर में होगा भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन
प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को दिसंबर 2024 में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया। रूसी राष्ट्रपति ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया। पुतिन ने आखिरी बार साल 2021 में भारत का दौरा किया था। उस समय उन्होंने 21वें वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में भाग लिया था।
इस आगामी सम्मेलन में दोनों देश कई नए समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। रक्षा सहयोग और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी। दोनों नेताओं ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का संकल्प दोहराया। इससे द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग
दोनों नेताओं ने आपसी व्यापार को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया। भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। रूस भारत को कच्चे तेल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। दोनों देश विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी मिलकर काम कर रहे हैं।
इस वार्ता में रक्षा सहयोग पर भी चर्चा हुई। भारत और रूस के बीच रक्षा सौदों की लंबी परंपरा रही है। दोनों देश संयुक्त रक्षा परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। इससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी बल मिलेगा। द्विपक्षीय संबंध नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।
वैश्विक मामलों में साझा दृष्टिकोण
भारत और रूस अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निकटता से काम करते आए हैं। दोनों देशों ने कई वैश्विक मुद्दों पर समान रुख अपनाया है। यह फोन वार्ता वैश्विक राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने में दोनों देशों की अहम भूमिका है।
भारत और रूस के बीच संबंध दशकों पुराने हैं। यह साझेदारी समय की कसौटी पर खरी उतरी है। दोनों देश नई वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह फोन वार्ता इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिलेगी।
