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लोग देख कर रहे थे दरवाजे बंद, कोई फ़ोटो खींच रहे थे, लेकिन किसी ने नही की मदद- वीर सिंह

मलाल इसका है कि ऐसा किसी के साथ हो सकता है। आखिर मरना तो सबको है लेकिन खौफनाक यह है कि मानवता मर रही है। रानीताल के समीपवर्ती क्षेत्र भंगवार के वीर सिंह के साथ घटी इस घटना ने सचमुच सबको हिलाकर रख दिया है। वीर सिंह ने कहा कि सुबह 4 बजे मां का निधन हुआ और मैं 11 बजे तक इंतजार करता रहा कि कोई सहायता को आएगा। वीर सिंह बताते हैं कि जब मैं लाश उठाकर जा रहा था तो लोग देखकर दरवाजे बंद कर रहे थे। कोई फोटो खींच रहे थे। बता दें कि यहीं से लाश को उठा ले जाने का फोटो पत्रकार तक पहुंच गया।

डॉक्टरों ने कहा-न हमारे पास बैड न ऑक्सीजन, आप देख लो क्या करना

वीर सिंह भंगवार में ही एक क्लीनिक में काम करता है। वीर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग पर भी आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि ऐसे तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन धरातल पर सब शून्य है। उसने बताया कि जब वो अपनी मां और सास को एम्बुलैंस के माध्यम से लेकर टांडा पहुंचे तो उनका पहले कोविड टैस्ट किया गया, दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर चिकित्सकों द्वारा कहा गया कि अस्पताल में हम उनको एडमिट नहीं कर सकते क्योंकि न तो यहां पर बैड खाली हैं और न ही ऑक्सीजन है इसलिए अब आप देख लो क्या करना है, ऐसे में हमने उनको कहा कि आप हमारे पेशैंट को एडमिट नहीं कर सकते तो फिलहाल दवाई ही दे दो, फिर हम इनको घर ही ले जाते हैं और हम दवाई लेकर घर आ गए और सुबह 4 बजे के करीब मां की मृत्यु हो गई।

जनप्रतिनिधियों पर साधा निशाना

वीर सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि आज शायद ही कोई शख्स होगा जिसे इस दर्दनाक घटना के बारे में पता न चला हो लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिनके सिर पर गांव का दायित्व है, गांव के हरेक व्यक्ति की जिम्मेदारी है, वे उस वक्त कहां थे। उन्होंने कहा कि चुनावों के समय जो अच्छे बुरे समय में पूरी तरह मदद की बड़ी-बड़ी बातें करके जनता से वोट मांगने आते हैं वे चुने हुए नुमाइंदे उस वक्त कहां थे। वीर सिंह कहते हैं कि बुरा दौर है, निकल जाएगा लेकिन मानवता देख ली मैंने। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रधान बीमार थे इसलिए नहीं आ सके पर पंचायत के बाकी प्रतिनिधियों में से भी उनके घर पर एक शख्स भी नहीं पहुंचा। ऐसे में प्रशासन को इस मामले को संज्ञानता में लेना चाहिए तथा उक्त पंचायत प्रतिनिधियों से जवाबतलबी करनी चाहिए कि आखिर उन्होंने इस समय में पीड़ित परिवार के लिए किस तरह से सहायता के लिए अपने कदम बढ़ाए। वीर सिंह ने पूछा कि क्या जन प्रतिनिधि ऐसे होने चाहिएं? बता दें कि वीर सिंह अपने घर से लेकर 1 किलोमीटर दूर श्मशानघाट तक अकेला मां के शव उठाकर ले गया लेकिन किसी इंसान की इंसानियत नहीं जागी।

सोशल मीडिया में खूब गूंजी बात

बता दें कि रानीताल के समीपवर्ती क्षेत्र भंगवार में गत दिवस कोरोना संक्रमण के कारण महिला की मौत के बाद उसे अकेले कंधे पर उठाकर ले जाने की खबर सोशल मीडिया पर खूब गूंजी। इसको लेकर तल्ख टिप्पणियों का दौर चलता रहा। बताते चलें कि वीरवार को कोरोना से मृत महिला की लाश को उठाने के लिए उसके बेटे के सिवाय 3 कंधे नहीं मिल पाए थे। महिला भंगवार पंचायत की पूर्व उपप्रधान भी रह चुकी है। ऐसे में महिला के पुत्र ने मां के शव को कंधे पर उठाकर श्मशानघाट तक पहुंचाया और अंतिम संस्कार किया। वहीं पति के पीछे डेढ़ वर्ष के बच्चे को कंधे से लगाए और दूसरे हाथ में अपनी सास के अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली सामग्री को लेकर उसकी पत्नी चली हुई थी। उधर आरोपों बारे टांडा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल भानु अवस्थी का कहना है कि उन्हेंं इस बारे कोई जानकारी नहीं है। पता करके ही बता पाऊंगा।

अंतिम संस्कार में दिक्कत हो तो प्रशासन से सम्पर्क करें : डीसी

उधर, डीसी राकेश प्रजापति ने कहा कि कोरोना संक्रमित के निधन पर भी अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन की देखरेख में पूरे प्रोटोकॉल की अनुपालना सुनिश्चित की जा रही है तथा किसी भी स्तर पर भ्रांतियों से दूर रहें और किसी भी तरह की समस्या होने पर स्वास्थ्य विभाग तथा प्रशासन के साथ संपर्क करें। उन्होंने कहा कि जिला तथा उमपंडल स्तर पर भी कोविड को लेकर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।

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