भारत में इलाज के इच्छुक लोगों को ‘वन स्टेप’ पोर्टल से मिलेगी जानकारी

RIGHT NEWS INDIA: इलाज के लिए भारत आने वाले लोगों को पूरी जानकारी मुहैया कराने के लिए ‘वन स्टेप’ पोर्टल खोला जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने जरूरतमंद लोगों को जानकारी मुहैया कराने के लिए दूसरे देशों में स्थिति भारतीय दूतावासों में सुविधा केंद्र खोलने का सुझाव दिया।

बिल्डिंग ब्रांड इंडिया’ विषय पर भारतीय विदेश सेवा (आइएफएस) के अधिकारियों के गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा कि भारत में इलाज कराने के इच्छुक लोगों की सुविधा और विश्वसनीय जानकारी देने के लिए एक ‘वन स्टेप’ पोर्टल स्थापित किया जाएगा।

दुनियाभर में बढ़ रही भारत की साख

स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक मांडविया ने कहा कि अपनी विश्व स्तरीय मेडिकल सुविधा और सेवाओं के चलते दुनियाभर में बेहतर इलाज के केंद्र के रूप में भारत की साख बढ़ रही है। आज के समय में दुनिया भर से बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने भारत में इलाज को बढ़ावा देने के लिए ‘हील इन इंडिया’ कार्यक्रम शुरू किया था। इसी तरह ‘हील बाय इंडिया’ कार्यक्रम भी शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत हमारे स्वास्थ्यकर्मियों को दुनियाभर में जाने का मौका मिलेगा और वे वैश्विक स्तर पर स्वस्थ्य समुदाय बनाने में योगदान कर पाएंगे। मांडविया ने दूसरे देशों के साथ स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में समझौतों पर बल देते हुए बताया कि जापान के साथ भारत ने ऐसा ही एक समझौता किया है, जिसके तहत जापान को दक्ष नर्सें उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक इलाज के लिए भारत आने वालों के लिए विशेष मेडिकल वीजा की सुविधा शुरू की गई है।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने मांगे सुझाव

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सभी से मेडिकल टूरिज्‍म क्षेत्र को मजबूत करने और भारत को ‘अतिथि देवो भव’ की भावना के अनुरूप एक ‘ग्लोबल मेडिकल हब’ बनाने के लिए सुझाव साझा करने का आग्रह किया। मेडिकल टूरिज्‍म इंडेक्‍स 2020-21 के अनुसार भारत वर्तमान में शीर्ष 46 देशों में से 10वें स्थान पर है, दुनिया के शीर्ष 20 वेलनेस पर्यटन बाजारों में 12वें स्थान पर है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 10 वेलनेस पर्यटन बाजारों में से पांचवें स्थान पर है। बता दें कि भारत में इलाज का खर्च अमेरिका की तुलना में 65 से 90 फीसदी तक कम है।

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