मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हालात कुछ ऐसे हो गए हैं कि यहां के श्मशान घाट और कब्रिस्तानों में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए जगह की कमी पड़ने लगी है। यहां के भदभदा विश्राम घाट को कोविड-19 से मरे लोगों के शव जलाने के लिए निर्धारित किया गया है, लेकिन शुक्रवार को यहां 41 शवों का अंतिम संस्कार किए जाने के बाद आठ शवों को लौटा दिया गया। उन्हें शनिवार की सुबह आने के लिए कहा गया। 

उल्लेखनीय है कि भोपाल में ऐसा दर्दनाक मंजर 37 साल के बाद देखने को मिला है। इसके पहले साल 1984 में हुई गैस त्रासदी के दौरान भी यहां के श्मशान घाट और कब्रिस्तान में शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह की कमी पड़ने लगी थी। 2, दिसंबर 1984 की रात को भोपाल में हुए गैस कांड में 10 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। तब भोपाल में विश्राम घाटों में शवों को जलाने के लिए जगह की भारी कमी पड़ गई थी।

भदभदा विश्राम घाट में शुक्रवार की रात नौ बजे तक अंतिम संस्कार के लिए आए 41 में से 29 शव कोरोना से मरने वाले लोगों के थे। इसी तरह सुभाष नगर में 26 दाह संस्कार किए गए, जिनमें से आठ लोगों की मौत कोरोना के कारण हुई थी। इसके अलावा जहांगीराबाद स्थित कब्रिस्तान में पांच लोग सुपुर्दे खाक किए गए। इनमें से चार लोगों की मौत कोरोना के कारण हुई। यदि भोपाल के सभी विश्राम घाट और कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार के लिए आए शवों की संख्या को जोड़ा जाए तो शुक्रवार को 75 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 41 मौतें कोरोना के कारण व अन्य मौतें सामान्य बीमारी के कारण हुईं।

भदभदा विश्राम घाट के अध्यक्ष अरुण चौधरी ने बताया कि भदभदा विश्राम घाट पर सिर्फ कोरोना के ही 29 अंतिम संस्कार होने के बाद रात साढ़े नौ बजे तक आठ शव और लाए जाने थे। इनमें से कोरोना से मरने वाले लोगों के चार शव हमीदिया अस्पताल और चार चिरायु अस्पताल से आने वाले थे, जिन्हें जगह की कमी के कारण रोक दिया गया। परिजनों से इन शवों का अंतिम संस्कार शनिवार को करने के लिए कहा गया। यदि इन आंकड़ों को भी जोड़ दिया जाए तो भोपाल में शुक्रवार को कोरोना से 49 लोगों की मौत हुई है। अरुण चौधरी ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पहली बार यहां इतने लोगों का अंतिम संस्कार किया गया।

इधर, सुभाष नगर विश्राम घाट के ट्रस्ट प्रबंधक शोभराज सुखवानी ने बताया कि वहां पांच संक्रमित मृतकों का दाह संस्कार किया। इनमें चार के शव भोपाल के थे जबकि एक का शव होशंगाबाद का था। इसके अलावा झदा कब्रिस्तान में पांच शवों को दफनाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भोपाल में पिछले वर्ष एक दिन में 28 शवों का अंतिम संस्कार किया गया था।

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