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पटना छात्रा मौत: पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले पुलिस के आत्महत्या के दावे के राज, शरीर पर मिले जख्मों ने बढ़ाए सवाल

Bihar News: पटना के कंकड़बाग स्थित एक छात्रा की रहस्यमय मौत का मामला गहरा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर कई जख्म और नाखून के निशान मिले हैं। यह खुलासा पुलिस के आत्महत्या के दावे पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एनईईटी की तैयारी कर रही इस छात्रा की मौत अब हत्या और दुष्कर्म की आशंका की ओर इशारा कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार छात्रा के शरीर पर दस से अधिक गंभीर चोटों के निशान हैं। गर्दन और कंधे सहित विभिन्न अंगों पर नाखून के खरोंच स्पष्ट दिखाई देते हैं। आंतरिक अंगों में भी चोट का जिक्र है। ये निशान बताते हैं कि छात्रा ने हमले का पूरी ताकत से विरोध किया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

पटनामेडिकल कॉलेज अस्पताल के बोर्ड ने यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में चोटों को सामान्य दुर्घटना का नतीजा नहीं बताया गया है। एक आशंका यह भी जताई गई है कि घटना से पहले छात्रा को नशीला पदार्थ दिया गया हो सकता है। इससे वह बेहोश हो गई और विरोध करने में असमर्थ रही।

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इस बीच पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले कहा था कि नशे की हालत में गिरने से चोट लगी होगी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह बयान विवादों में घिर गया है। अब पटना पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

पुलिस की कार्रवाई पर उठते सवाल

सबसेबड़ा सवाल यह है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही पुलिस ने आत्महत्या का दावा क्यों किया। परिजनों के हत्या और दुष्कर्म के आरोपों पर गंभीरता से कार्रवाई क्यों नहीं हुई। छात्रा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा वाले अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया।

पुलिस ने शुरुआत में शरीर पर मौजूद जख्मों को क्यों नजरअंदाज किया। रिपोर्ट आने के बाद भी पुलिस विभाग चुप क्यों है। हॉस्टल में सब कुछ सामान्य बताने के बाद सबूत मिटाने के आरोप में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई। यह विरोधाभास भी स्पष्ट नहीं है।

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घटनास्थल पर कई गड़बड़ियों के संकेत

पुलिस काकहना है कि छात्रा बेहोश होकर कमरे में गिरी थी। फिर भी कमरे का दरवाजा सूचना के बिना तोड़ा गया। इसकी वजह भी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय थाना की जांच में लापरवाही के संकेत मिलते हैं। शक की सुई सबसे पहले जांच अधिकारियों की तरफ इशारा कर रही है।

पुलिस को इतनी जल्दबाजी क्यों हुई कि उन्होंने रिपोर्ट का इंतजार तक नहीं किया। किस डॉक्टर के बयान को पुलिस अधिकारी कोट कर रहे थे। यह प्रश्न भी अनुत्तरित है। पुलिस के बयानों ने इस पूरे मामले को और उलझा दिया है।

अब नजर छात्रा को न्याय दिलाने की कार्रवाई पर टिकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद अपराधिक धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। परिवार को न्याय मिले यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। पूरा मामला सुरक्षा और न्याय प्रणाली की गंभीर चुनौती बन गया है।

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