Patna News: राजधानी पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मुन्नाचक इलाके के हॉस्टल में रहने वाली इस छात्रा के साथ हुई घटना में पुलिस और अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल की 127 पन्नों की मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। इस खुलासे ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेडिकल रिपोर्ट बनाम पोस्टमार्टम: आखिर सच क्या है?
छात्रा की मौत के बाद सामने आए तथ्यों ने मामले को पूरी तरह उलझा दिया है। अस्पताल की 127 पन्नों की भारी-भरकम मेडिकल रिपोर्ट में छात्रा के प्राइवेट पार्ट में किसी भी तरह की चोट का जिक्र नहीं था। पुलिस ने शुरुआत में इसी रिपोर्ट को आधार मानकर यौन शोषण की आशंका को खारिज कर दिया था। लेकिन, जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई तो सब सन्न रह गए। इसमें छात्रा के प्राइवेट पार्ट में चोट और सूजन की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, अस्पताल की रिपोर्ट में सिर पर चोट बताई गई थी, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट का कोई निशान नहीं मिला।
तीन अस्पताल बदले, लेकिन पुलिस गायब रही
घटना की शुरुआत 6 जनवरी को हुई थी, जब छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली थी। हॉस्टल के कर्मचारी उसे लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे। सबसे पहले उसे सहज सर्जरी क्लीनिक ले जाया गया। वहां से उसे प्रभात मेमोरियल और अंत में मेदांता अस्पताल रेफर किया गया। 6 से 9 जनवरी तक इलाज के नाम पर अस्पताल बदलने का यह खेल चलता रहा। आखिरकार 11 जनवरी को छात्रा ने दम तोड़ दिया। हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामले के दौरान पुलिस कहीं भी नजर नहीं आई।
सुबूतों की अनदेखी और लीपापोती का आरोप
परिजनों ने 9 जनवरी को चित्रगुप्तनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद पुलिस ने न तो हॉस्टल को सील किया और न ही उस कमरे की जांच की जहां छात्रा बेहोश मिली थी। जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते पुलिस वहां पहुंचती तो अहम सुबूत मिल सकते थे। जमीनी पड़ताल में यह बात सामने आ रही है कि मामले में बड़ी लीपापोती की कोशिश की गई है। अगर मेडिकल रिपोर्ट में चोट की सही जानकारी छिपाई नहीं जाती, तो पुलिस शायद रेप के एंगल से पहले ही जांच शुरू कर देती और आरोपी पकड़ में आ सकते थे।

