फीस बिल; अभिभावकों ने की स्कूल की मनमानी पर 10 साल की कैद और 30 लाख जुर्माने की मांग

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Himachal News: राज्य में निजी स्कूलों की मनमानी पर नुकेल कसने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए बिल (फीस व अन्य संबंधित मुद्दों का विनियमन) कानून 2021 का स्कूल प्रबंधक विरोध कर रहे हैं। वहीं अभिभावक व आम लोगों ने इस बिल को और ज्यादा सख्त बनाने की मांग की है। शिक्षा विभाग के पास प्रदेशभर से इसको लेकर सुझाव भी आए हैं। निजी स्कूल प्रबंधकों ने अपने सुझावों में कहा है कि इस बिल को लाने की जरूरत ही नहीं है। जबकि अभिभावकों व आम लोगों की तरफ से आए सुझावों में इस बिल में कई बदलाव की मांग की गई है। इसमें निजी स्कूलों पर 10 लाख रुपये जुर्माना और 10 साल की कैद का प्रविधान करने की मांग उठाई है। शिक्षा विभाग ने 30 जून तक इसको लेकर सुझाव मांगे थे।

निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग डा. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि सुझावों को कंपाइल किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट सचिव को भेजी जाएगी। सुझाव के बाद बिल के प्रारूप को अंतिम रूप देते समय लोगों के सुझावों को भी शामिल किया जाएगा। अभिभावक संघ ने संयुक्त सचिव को सौंपा सुझाव

अभिभावक संघ शिमला का प्रतिनिधिमंडल संयुक्त निदेशक उच्चतर शिक्षा व प्रारंभिक शिक्षा से मिला। संघ ने उन्हें बिल को लेकर कई सुझाव दिए। संघ के अध्यक्ष रमेश ठाकुर ने कहा कि शिक्षा विभाग से शहर के एक निजी स्कूल द्वारा 50 फीसद फीस बढ़ाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा जो स्कूल मासिक आधार पर फीस नहीं ले रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग उठाई है। रमेश ठाकुर की अध्यक्षता में संजय, राकेश और विक्रम ने संयुक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा हितेश आजाद और उच्चतर शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक अथीश कुमार मिश्रा से मुलाकात की।

यह दिए सुझाव

– फीस वृद्धि से संबंधित निर्णय जनरल हाउस में लिया जाए। इसमें अभिभावक, अभिभावक संघ के सदस्य, पीटीए सदस्य एवं स्कूल प्रशासन मौजूद हो।

-फीस वृद्धि प्रति वर्ष केवल अधिकतम तीन फीसद ही सुनिश्चित की जाए।

– स्कूलों पर दोषी पाए जाने की स्थिति में जुर्माना पांच लाख से बढ़ाकर कम से कम 30 लाख किया जाए।

-सभी स्कूलों में खेलकूद एवं अन्य आवश्यक प्रतियोगिताओं को अनिवार्य किया जाए, जिसमें प्रदेश स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिताएं अनिवार्य हों।

-प्रत्येक वर्ष पीटीए की महासभा अभिभावक एवं अभिभावक संघ के साथ अनिवार्य की जाए।

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