मंगलवार रात आठ बजे से दस बजे दो घण्टे के लिए हिमाचल प्रदेश अभिभावक संघ के अधिकतर सदस्यों ने हिस्सा लिया। जिसमें उपस्थित सदस्यों ने अपनी अपनी उपयोगी एवं संक्षिप्त राय रखीं। इस वी. सी. में विशेष तौर पर हिमाचल प्रदेश सरकार के द्वारा निजी स्कूल फीस नियमन बिल में किये जा रहे विलम्ब पर गहरी चिंता जताई गई। यह विलम्ब हिमाचल प्रदेश सरकार के दिए गए आश्वासनों के विपरीत है। यह विलम्ब लोकहित में भी नहीं है। इससे जनता के बीच साफ़ सन्देश भी नहीं जा रहा है। इसमें यह भी चर्चा की गई कि हिमाचल प्रदश में आम नागरिक की आय का साधन सीमित है इसके बावजूद भी एक आम नागरिक अपनी भविष्य की पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए अच्छी और उन्नत शिक्षा के लिए जैसे- तैसे इन्हें अपने घर एवं गांव से दूर निजी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं।

पूर्व में इन हिमाचल प्रदेश निजी स्कूलों का फीस कुछ हद तक तर्कसंगत और प्रासंगिक भी रहता रहा है। परन्तु यह निजी स्कूल के मालिक अभिवावकों की एकता के आभाव में, बटा-खाता के चक्कर में एवं प्रदेश में इन निजी स्कूल को नियमित कानून के आभाव के कारण जब मर्ज़ी मनचाहा तरीके से विभिन्न शुल्क बढ़ा देते हैं।

इस डिजिटल बैठक में शिक्षा के घोर व्यवसायीकरण पर गहरी चिंता प्रकट की गई। और यह सर्वसम्मति से सहमती बनी कि शिक्षा के मंदिर का मुख्य उद्देश्य ज्ञान के लिए किये जाने के बजाय घोर लाभ ले लिए किया जा रहा है। अतः यह निर्णय लिया गया कि सब लोग अपने स्थानीय विधायकों से संपर्क करें ताकि हमारी यह चिंता और आवाज़ हमारे प्रदेश के वर्तमान कल्याणकारी सरकार के कान पर एक बार फिर हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से लोकतंत्र के मन्दिर के माध्यम से पहुँच पाए। ताकि हमारे प्रदेश में भी दिल्ली की तरह शिक्षा विनियमित हो और शिक्षा का स्तर भी बढे। बैठक में अध्यक्ष हरि शंकर तिवारी, सचिव सी .एल. शर्मा , संयुक्त सचिव हमिन्द्र धौटा , कुलदीप, यशपाल ,प्रतिभा, डॉ संजय पाण्डेय, पवन मेहता, अम्बीर सहेजटा, विक्रम, कुसुम, जितेन्द्र रमेश एवं अन्य मौजूद रहे।

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