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पैराग्लाइडिंग हादसा कुल्लू: गड़सा में अनियंत्रित पैराग्लाइडर पेड़ से टकराया, पायलट घायल

Himachal News: कुल्लू जिले के लोकप्रिय गड़सा पैराग्लाइडिंग साइट पर रविवार को एक बार फिर दुर्घटना हुई। लैंडिंग के दौरान पैराग्लाइडर निर्धारित स्थान से दूर एक खेत के पेड़ में फंस गया। इससे पैराग्लाइडर अनियंत्रित हो गया। घटना में पायलट को चोटें आई हैं जबकि पर्यटक सुरक्षित है। स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद कर पायलट को अस्पताल पहुंचाया।

स्थानीय पुलिस ने इस मामले की जानकारी मिलते ही संज्ञान लिया है। थाना भुंतर पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह हादसा मौसम की स्थिति के कारण हुआ या फिर तकनीकी खराबी के चलते।

पैराग्लाइडर के पायलट नीरज, जो गड़सा के स्थानीय निवासी हैं, को उपचार के बाद राहत मिली है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है और आई चोटें गंभीर नहीं हैं। समय पर राहत कार्य होने से किसी बड़ी त्रासदी को टाला जा सका।

पर्यटन अधिकारी ने लापरवाही पर कार्रवाई का संकेत दिया

जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. रोहित शर्मा ने बताया कि मामले की पूरी तरह से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देशों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया जा रहा है।

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इस घटना ने गड़सा साइट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। पैराग्लाइडिंग जैसी साहसिक गतिविधियों में सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। स्थानीय स्तर पर इन व्यवस्थाओं पर पुनः चर्चा शुरू हो गई है।

गड़सा साइट का पुराना रिकॉर्ड चिंताजनक

यह इस साइट पर होने वाला पहला हादसा नहीं है। इससे पहले 28 दिसंबर को भी यहां एक गंभीर घटना हुई थी। उस समय एक पर्यटक लगभग सत्तर फीट की ऊंचाई से गिर गया था। महाराष्ट्र के उस पर्यटक को गंभीर हालत में पीजीआई चंडीगढ़ भेजा गया था।

पिछले कुछ वर्षों में इस साइट पर कई अन्य छोटे-मोटे हादसे भी दर्ज किए गए हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। इनसे निपटने के लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता है।

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पर्यटन उद्योग पर स्थानीय अर्थव्यवस्था निर्भर होने के कारण इन घटनाओं का व्यापक प्रभाव पड़ता है। सुरक्षा उपायों में किसी प्रकार की ढिलाई न केवल जानलेवा साबित हो सकती है बल्कि क्षेत्र की छवि भी खराब कर सकती है। अधिकारियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा।

पुलिस जांच के तहत हादसे के सभी संभावित कारणों को देख रही है। इनमें लैंडिंग के समय हुई तकनीकी चूक, मौसम संबंधी अवस्थाएं या फिर उपकरण में खराबी शामिल हो सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट तथ्य सामने आ पाएंगे।

हिमाचल प्रदेश में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पैराग्लाइडिंग एक प्रमुख गतिविधि है। ऐसे में हर स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे पर्यटकों का विश्वास बना रहता है।

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