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‘पापा मुझे बचा लो’… आंखों के सामने डूब गया इकलौता बेटा, 70 फीट गहरे गड्ढे से आई आखिरी पुकार

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार की रात एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। यहां कोहरे और प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान चली गई। 27 वर्षीय युवराज मेहता की कार 70 फुट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। डूबने से पहले युवक ने पिता को फोन कर मदद की भीख मांगी। पिता मौके पर पहुंचे, लेकिन बेबस होकर बेटे को डूबते देखते रहे। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी उसे जिंदा नहीं बचा सकी।

आखिरी कॉल और पिता की बेबसी

हादसे का शिकार हुए युवराज मेहता गुरुग्राम स्थित डनहमबी कंपनी में काम करते थे। शुक्रवार रात वह अपनी विटारा ब्रीजा कार से घर लौट रहे थे। तभी कोहरे के कारण उनकी कार अनियंत्रित होकर एक गहरे गड्ढे में गिर गई। कार पानी में डूब रही थी, लेकिन युवराज किसी तरह छत पर चढ़ गए। उन्होंने तुरंत अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन किया। पिता जब बदहवास हालत में वहां पहुंचे, तो बेटा चिल्ला रहा था, “पापा मुझे बचा लो।”

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सिस्टम और ठंड के आगे हारी जिंदगी

पिता ने बेटे को बचाने की बहुत कोशिश की। थोड़ी देर में पुलिस और फायर ब्रिगेड भी आ गई। हालांकि, आधी रात का घना कोहरा और पानी की बर्फीली ठंड बाधा बन गई। इसके अलावा, पानी के अंदर लोहे की नुकीली सरिया होने के डर से कोई भी गोताखोर तुरंत नीचे नहीं उतरा। प्रशासन की आंखों के सामने युवराज की आवाज धीरे-धीरे शांत हो गई। घंटों बाद राहत कर्मी सिर्फ उनका बेजान शरीर ही बाहर निकाल पाए।

10 दिन पुरानी गलती पड़ी भारी

इस दर्दनाक मौत का जिम्मेदार सिर्फ मौसम नहीं था। जांच में सामने आया है कि जिस जगह कार गिरी, वहां की बाउंड्री वॉल पहले से टूटी हुई थी। खबरों के मुताबिक, करीब 10 दिन पहले एक ट्रक ने इस दीवार को तोड़ा था। ट्रक तो गिरने से बच गया, लेकिन दीवार की मरम्मत नहीं कराई गई। शुक्रवार को घने कोहरे में युवराज को वह टूटा हुआ हिस्सा नहीं दिखा। अगर समय रहते दीवार ठीक हो जाती, तो शायद आज युवराज जिंदा होते।

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मां के बाद बेटे का साया भी उठ गया

युवराज मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले थे। उनके पिता ने बताया कि बेटे ने पढ़ाई और करियर के लिए बहुत संघर्ष किया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ पहले ही टूट चुका था, क्योंकि दो साल पहले युवराज की मां का निधन हो गया था। उनकी बहन ब्रिटेन में रहती हैं। युवराज का अंतिम संस्कार सफीपुर में किया गया, जहां पिता, रिश्तेदार और दोस्त नम आंखों से विदा देने पहुंचे।

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